भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए 6 भारतीय जवानों के नाम सरकार ने आधिकारिक रूप से पहली बार सार्वजनिक किए हैं. इनमें पांच थल सेना के जवान थे और वायु सेना के जवान शामिल हैं. भारतीय सेना के इन वीर जवानों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट 'रोल ऑफ ऑनर' में दर्ज किया गया है. जबकि इनके नाम दिल्ली के 'त्याग चक्र' में भी स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए जाएंगे. यह जानकारी नेशनल वॉर मेमोरियल की तरफ से दी गई है. अब लोगों के मन में ये सवाल भी उठ रहे हैं कि दिल्ली में स्थित 'त्याग चक्र' आखिर है क्या और इसे कब बनाया गया था.

कहां बना है 'त्याग चक्र'?

त्याग चक्र नई दिल्ली के इंडिया परिसर के पास बने राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) में बने चार प्रमुख संकेंद्रित वृत्तों में से एक है. त्याग चक्र देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के वीर शहीदों के लिए बनाया गया है.

---विज्ञापन---

हजारों सैनिकों ने मातृभूमि के लिए न्यौछावर की अपनी जान

इस चक्र के माध्यम से इन वीर जवानों को हमेशा के लिए अमर बनाया गया है. क्योंकि भारत देश ने आजादी के बाद से कई बड़े युद्ध लड़े हैं. जबकि कई सैन्य अभियान भी चलाए गए हैं. जिनमें हजारों सैनिकों ने अपनी मातृभूमि के लिए अपने प्राण भी न्यौछावर किए हैं. जिनके नाम त्याग चक्र में अंकित किए गए हैं. त्याक चक्र की दीवारों को ग्रेनाइट पत्थरों से बनाया गया है.

---विज्ञापन---

ग्रेनाइट पत्थरों से बनी 16 वृत्ताकार दीवारें

त्याग चक्र महाभारत के चक्रव्यूह के पैटर्न से प्रेरित हैं. इसमें ग्रेनाइट पत्थरों से बनी 16 वृत्ताकार दीवारें हैं. जिसमें सोने के अक्षरों से खुदे 25,000 से अधिक शहीदों के नाम अंकित हैं. देश हमेशा इन वीर जवानों के प्रति ऋणी रहेगा.

---विज्ञापन---

भारत-चीन युद्ध सहित कई युद्ध के शहीदों के नाम अंकित

त्याग चक्र में 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 भारत-पाक युद्ध, 1971 भारत-पाक युद्ध, 1999 भारत-पाक करगिल युद्ध. के शहीदों के नाम अंकित हैं. यहां आने वाले नागरिकों को यह चक्र याद दिलाता है कि भारत की रक्षा के लिए कितने वीरों का निस्वार्थ त्याग छिपा है. ऑपरेशन सिंदूर में शहीद होने वाले 6 जवानों के नाम भी सवर्ण अक्षरों में इसी त्याग चक्र में अंकित किए जाएंगे. इस चक्र को बड़ा उद्देश्य वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को राष्ट्रवाद, देशभक्ति और कर्तव्यपरायणता की भावना को भी बताना है.

---विज्ञापन---

यह चक्र भारतीयों में एकता की भावना पैदा करता है

त्याग चक्र की संरचना को चक्रव्यूह से लेने की भी एक अहम वजह है. क्योंकि यह रचना सैनिकों के साहस के साथ-साथ उनकी रणनीति को भी बताती है कि कैसे युद्ध के मैदान में हमेशा डटे रहना चाहिए. ऐसे में जब देश के आम लोग त्याग चक्र पर आकर इन वीर जवानों के नाम देखते हैं, तो उनके मन में राष्ट्र के प्रति सम्मान और देश के प्रति जज्बा पैदा होता है. यह चक्र भारतीयों में एकता की भावना पैदा करता है.

---विज्ञापन---

त्याग चक्र के अलावा तीन और चक्र हैं शामिल

त्याग चक्र के अलावा यहां तीन और चक्र बने हुए हैं. जिसमें अमर चक्र भी शामिल है. यह स्मारक केंद्रीय और आंतरिक चक्र है. जो शहीदों की अमरता का प्रतीक माना जाता है. यहां 15.2 मीटर ऊंचा एक विशाल ग्रेनाइट स्तंभ बना है. जिसमें 'अमर जवान ज्योति' 24 घंटे जलती है. यह पवित्र ज्योति देश की रक्षा के लिए कभी न मिटने वाली आत्मा और उनके अमर योगदान को दर्शाती है.

वीरता चक्र

वीरता का घेरा… तीसरा घेरा भारतीय सेना की वीरता को दर्शाता है. यह एक ढकी हुई गैलरी के रूप में है, जिसमें कांस्य (ब्रॉन्ज़) से बनी छह भित्ति-चित्र (म्यूरल) लगे हैं. ये चित्र भारतीय सशस्त्र बलों की वीरतापूर्ण लड़ाइयों को दिखाते हैं. इन चित्रों को देखकर आपको भारतीय सेना के साहस का परिचय मिलता है.

रक्षक चक्र

चौथा चक्र 'रक्षक चक्र' बना है. जो भारत की सीमाओं की अटूट सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. इस चक्र को कतार में लगाए गए 600 से अधिक घने पेड़ों से बनाया गया है. यह कतार बताती है कि जिस तरह से इन पेड़ों ने स्मारक को घेरा हुआ है. उसी तरह से हमारे देश के जवानों ने भी हमारी सीमाओं को घेरा हुआ है. जहां भारतीय वीर जवान दिन रात तैनात रहकर देश की रक्षा करते हैं.

अमर चक्र

अमरता का चक्र... इसमें एक ओबिलिस्क (स्तंभ) है जिस पर 'अमर ज्योति' जलती रहती है. यह ज्योति शहीद सैनिकों की आत्मा की अमरता का प्रतीक है और इस बात का भरोसा दिलाती है कि देश उनके बलिदानों को कभी नहीं भूलेगा.