FIR against Rahul Gandhi: पूरी दुनिया में अमेरिका या ब्रिटेन जैसे कई देश अपने नागरिकों को दो देशों का पासपोर्ट रखने की इजाजत देते हैं, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के मुताबिक, जैसे ही कोई भारतीय नागरिक किसी दूसरे देश की नागरिकता लेता है, उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप खत्म हो जाती है. यह मामला राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़ा है. भारत के संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ दो देशों की नागरिकता नहीं रख सकता.

याचिकाकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया है. जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह आदेश बीजेपी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.

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राहुल गांधी पर क्या आरोप हैं?

यह पूरा विवाद एक कंपनी 'बैकॉप्स लिमिटेड' से शुरू हुआ, जो ब्रिटेन (UK) में रजिस्टर्ड थी. आरोप है कि साल 2003 से 2009 के बीच इस कंपनी के दस्तावेजों में राहुल गांधी को 'ब्रिटिश नागरिक' दिखाया गया था. याचिकाकर्ता का दावा है कि राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटिश नागरिक घोषित किया था और वहां का पासपोर्ट या कानूनी दर्जा हासिल किया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में दावा किया गया था कि राहुल गांधी ने विदेशी नागरिकता के तथ्यों को छुपाया है.

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अदालत में क्या हुआ?

कोर्ट ने कहा कि आरोपों की जांच होनी चाहिए. उसने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि या तो खुद इस मामले की जांच करे या फिर किसी केंद्रीय एजेंसी से इसकी जांच करवाए. यह फैसला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर द्वारा दायर की गई याचिका पर आया है. याचिकाकर्ता ने कुछ दस्तावेज भी पेश किए हैं जो कथित तौर पर ब्रिटिश कंपनी के रिटर्न से जुड़े हैं, जहां राहुल गांधी को 'ब्रिटिश नागरिक' बताया गया था.

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अब आगे क्या होगा?

कोर्ट के इस आदेश के बाद अब पुलिस को कानूनी प्रक्रिया के तहत मामला दर्ज करना होगा. यदि जांच में यह साबित होता है कि राहुल गांधी ने विदेशी नागरिकता ली थी तो उनकी संसद सदस्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है. हालांकि, कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी की कानूनी टीम की ओर से इसे राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है.

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