सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ 2019 में दिए गए एक बयान को लेकर महाराष्ट्र की अधीनस्थ अदालत में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ जारी मानहानि मामले की आगे की कार्यवाही पर मंगलवार को रोक लगा दी. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता एमएच श्रीश्रीमल को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.
महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी
मुंबई हाईकोर्ट के आठ सितंबर के आदेश को चुनौती देने वाली राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने निर्देश दिया, ‘जारी किए गए नोटिस का चार सप्ताह में जवाब दाखिल करें. अधीनस्थ अदालत के समक्ष आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी.’ हाईकोर्ट ने आठ सितंबर के अपने आदेश में राहुल गांधी को मानहानि मामले में जारी समन को रद्द करने से इनकार कर दिया था.
रायबरेली से सांसद राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इस विषय पर कानून पहले से तय और स्थापित है. पीठ ने इस मामले को चार सप्ताह बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है.
HC से नहीं मिली थी राहत
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गिरगांव मजिस्ट्रेट के 28 अगस्त, 2019 के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ दायर श्रीश्रीमल की शिकायत पर आपराधिक प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया था. हालांकि, हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को शिकायत पर सुनवाई छह सप्ताह के लिए बढ़ाने का निर्देश देने के 2021 के अपने आदेश को जारी रखा ताकि गांधी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें.
शिकायतकर्ता श्रीश्रीमल ने उच्च न्यायालय में राहुल की याचिका का विरोध करते हुए दावा किया था कि भाजपा का सदस्य होने के नाते वह भी अपने नेता के खिलाफ की गई टिप्पणी से व्यथित हैं. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने 20 सितंबर 2018 को राजस्थान में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को लेकर यह टिप्पणी की और उनका अपमान किया था. शिकायतकर्ता ने दावा किया कि राहुल के बयान भाजपा के सभी सदस्यों और प्रधानमंत्री मोदी से जुड़े सभी भारतीय नागरिकों पर सीधे तौर पर आरोप लगाने के समान थे.