बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ की वजह से ओडिशा और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग ने तूफान के 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यानम के पास पहुंचने का अनुमान जताया है. तूफान मंगलवार सुबह बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में विशाखापत्तनम से लगभग 260 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में केंद्रित था. इसके मंगलवार शाम तक पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और उसके बाद उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़ने की संभावना है.
बंगाल की खाड़ी में उठे इस समुद्री बवंडर को ‘चक्रवात’ बताया गया है. लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि आखिर यह कैसे तय होता है कि ये तूफान चक्रवात है और हरीकेन, टाइफून से कैसे अलग है. मौसम विज्ञान के नजरिए से देखें तो हरीकेन, टाइफून और चक्रवात अलग-अलग मौसमी आपदाएं नहीं हैं, ये सभी ट्रॉपिकल स्टॉर्म हैं. इनमें कोई ज्यादा फर्क नहीं होता, बस यह देखा जाता है कि यह समुद्री तूफान दुनिया के किस हिस्से या महासागर में पैदा हुए हैं.
ऐसे होता है तय
अमेरिकी मौसम एजेंसी एनओएए के मुताबिक, अमेरिका या कैरेबियाई देशों के आसपास उत्तरी अटलांटिक महासागर और उत्तर-पूर्वी प्रशांत महासागर में जो समुद्री तूफान पैदा होता है, उसे हरीकेन कहा जाता है. जब यह तूफान फिलीपींस, जापान और चीन के तटीय क्षेत्र उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में बनता है तो इसे टाइफून नाम दे दिया जाता है. इसके अलावा जब दक्षिण प्रशांत महासागर और हिंद महासागर जैसे बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में तूफान उठता है तो यह चक्रवात बन जाता है.
किस मौसम में कौन सा तूफान आता है?
हरीकेन, टाइफून और चक्रवात तीनों अलग-अलग मौसम में आते हैं. अटलांटिक में ज्यादातर हरीकेन जून से नवंबर के बीच में पैदा होते हैं. वहीं, उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में टाइफून वैसे तो साल भर बन सकते हैं, लेकिन ज्यादा एक्टिव मई से अक्टूबर के बीच होते हैं. इनके अलावा चक्रवात आने का मुख्य सीजन नवंबर से अप्रैल के बीच माना जाता है.
कैसे बनते हैं ये तूफान?
इन तूफानों के बनने का विज्ञान पूरी तरह समुद्र के गर्म पानी और हवा के तालमेल पर टिका है. जब समुद्र का पानी गर्म होता है, तो उसके संपर्क में आने वाली हवा तेजी से गर्म होकर ऊपर उठती है. जैसे ही गर्म हवा ऊपर उठती है, नीचे का दबाव कम हो जाता है. ठंडी हवा इस जगह को भरने आती है और नीचे से और गर्म हवा ऊपर उठने के कारण एक तेज चक्र शुरू हो जाता है. समुद्र के ऊपर इसकी वजह से ऊंची और खतरनाक लहरें बनती हैं. जिसके बाद ये तूफान आते हैं.
कैसे रखे जाते हैं इनके नाम?
तूफानों के नाम रखने की मॉनिटरिंग संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन करती है. इसके लिए संबंधित क्षेत्रों के देश मिलकर नामों की एक सूची इस संगठन को भेजते हैं. इसके बाद इनका नाम तय किया जाता हैं. हालांकि, इसमें ये भी देखा जाता है कि किसी भी देश की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा जो तूफान ज्यादा तबाही मचाता हैं, उनके नाम हमेशा के लिए लिस्ट से हटा दिए जाते हैं.
कितना खतरनाक है अर्नब?
अर्नब चक्रवात के तट से टकराने के दौरान 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. यह रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है. ओडिशा में मौसम विभाग ने पुरी, गजपति, गंजाम, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरि जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, कटक और खुर्दा सहित 16 जिलों के लिए सात से 11 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान जताते हुए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है. वहीं, आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि राज्य के उत्तरी तटीय जिलों में भारी बारिश की आशंका है. श्रीकाकुलम में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है, जबकि तटीय जिलों में तेज हवाएं चलने लगी हैं.