पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें सरकार ने साफ कहा कि देश में ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पैनिक की कोई जरूरत नहीं है. बैठक करीब डेढ़ घंटे चली. बैठक की शुरुआत रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के संबोधन से हुई, जिसके बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया . विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी विपक्ष के सवालों के जवाब दिए.

कौन-कौन रहा मौजूद

बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी शामिल हुए. वहीं विपक्ष की ओर से जेडीयू के लल्लन सिंह, संजय झा, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, कांग्रेस के तारिक अनवर, मुकुल वासनिक, CPI(M) के जॉन ब्रिटास, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह समेत कई नेता पहुंचे. हालांकि तृणमूल कांग्रेस का कोई सांसद बैठक में मौजूद नहीं रहा.

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सरकार का पक्ष: ऊर्जा और सुरक्षा पर भरोसा


सरकार ने प्रेजेंटेशन में बताया कि:

  • देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है.
  • LPG और कच्चे तेल की अग्रिम बुकिंग कर ली गई है.
    •विभिन्न देशों से ऊर्जा आपूर्ति के लिए बातचीत का दायरा बढ़ाया गया है.
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अब तक भारत के 4 जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं, जबकि कई देशों के जहाज अभी फंसे हैं.
  • अगले 4–5 दिनों में और जहाज भारतीय तट पर पहुंचेंगे.
  • अब तक करीब 4.25 लाख लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. सरकार ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत में साफ कहा है कि भारत युद्ध नहीं चाहता. भारत शांति बहाली का पक्षधर है .

विपक्ष के सवाल और सरकार के जवाब

बैठक में विपक्ष ने कई मुद्दे उठाए:

  1. हॉर्मुज और ऊर्जा सप्लाई पर चिंता
    सरकार ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और आपूर्ति बाधित नहीं होगी.
  2. अमेरिका-इजरायल के हमले पर सवाल
    विदेश सचिव ने बताया कि ईरान ने परमाणु गतिविधियों को लेकर आश्वासन दिया था, लेकिन वह उस दिशा में आगे बढ़ रहा था, जिसके बाद यह स्थिति बनी.
  3. पाकिस्तान की मध्यस्थता का मुद्दा
    सरकार का स्पष्ट जवाब:
    'हम कोई दलाल देश नहीं हैं, हम मध्यस्थता क्यों करें.' साथ ही कहा गया कि अमेरिका लंबे समय से पाकिस्तान का इस्तेमाल इस भूमिका में करता रहा है.
  4. ईरान के नेतृत्व पर शोक संदेश में देरी
    सरकार ने बताया कि नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास चार दिन बाद खुला, तब जाकर औपचारिक संवेदना व्यक्त की गई.
  5. प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे की टाइमिंग
    विपक्ष ने इस पर भी सवाल उठाए.
  6. संसद में चर्चा की मांग
    विपक्ष ने पश्चिम एशिया संकट पर शॉर्ट ड्यूरेशन डिस्कशन और प्रधानमंत्री के जवाब की मांग की. बैठक में फोकस पूरी तरह ईरान, युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा पर रहा. सरकार ने सभी दलों को आश्वस्त किया कि वे किसी भी समय जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हैं.

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सरकार ने सर्वदलीय बैठक के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिति मजबूत है. वहीं विपक्ष ने पारदर्शिता, विदेश नीति और रणनीतिक फैसलों पर सवाल उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की.