Prashant Bhushan On Regime Change: वकील प्रशांत भूषण ने 15 अक्टूबर को सरकार बदलने की मांग का बचाव करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीकों से सत्ता परिवर्तन की मांग करना एक वैध संवैधानिक अधिकार है. उनके ये बयान चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की तरफ से वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच आए हैं. दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए भूषण ने कहा कि नागरिकों द्वारा एक अलग सरकार की मांग करने में कुछ भी गलत नहीं है. उन्होंने भाजपा पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि इस पार्टी ने भी पहले सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर प्रदर्शन आयोजित किए हैं.
‘सरकार की आलोचना गलत नहीं’
प्रशांत भूषण ने देशद्रोह पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि सरकार की आलोचना को तब तक आपराधिक अपराध नहीं माना जाना चाहिए, जब तक कि उसमें हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था भड़काने जैसी बातें शामिल न हों. उन्होंने चल रहे विरोध प्रदर्शन को सरकार बदलने की मांग करने वाला एक आंदोलन बताया.
CJP ने दिल्ली में सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि लगाई गई कड़ी पाबंदियों ने आम जनजीवन में रुकावट पैदा कर दिया है, जिससे प्रदर्शनकारी, छात्र और विपक्षी नेता प्रभावित हुए हैं. दिपके ने कहा कि युवा पिछले 10-15 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं और आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों को जबरन वहां से हटा दिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन सहित कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है.
दीपके ने ज्ञानेश कुमार को दी गई सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के चीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी फायदा पहुंचाने में मदद कर रहे हैं. सीजेपी और दूसरे संगठनों ने शनिवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगे के साथ प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. ANI के मुताबिक आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन किया है.
भाजपा ने प्रदर्शनकारियों पर लगाया आरोप
प्रशांत भूषण के बयानों पर रिएक्ट करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रदर्शनकारियों पर अराजकता फैलाने और हिंसा भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया. भाटिया ने कहा कि सेना के जवानों और पुलिस अधिकारियों से सड़कों पर उतरकर विरोध करने की अपील करना असंवैधानिक और गैर-कानूनी है. इन विरोधाभासी बयानों से पता चलता है कि वोटर लिस्ट के एसआईआर और चीफ इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ की जा रही मांगों को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ता जा रहा है.