देश की करीब 8.72 लाख वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए केंद्र सरकार ने UMEED पोर्टल बनाया था. लेकिन एक साल बाद भी तस्वीर अधूरी है. करीब 62 फीसदी संपत्तियों को ही अंतिम मंजूरी मिल पाई है, जबकि करीब 1.06 लाख यानी लगभग 33 फीसदी संपत्तियां ऐसी हैं, जिनका रिकॉर्ड आज तक पोर्टल पर जमा ही नहीं हुआ. ऐसे में सवाल सिर्फ रजिस्ट्रेशन का नहीं, बल्कि इन संपत्तियों के भविष्य का भी है.
6 जून को UMEED पोर्टल लॉन्च करते समय केंद्र सरकार ने देश के 38 वक्फ बोर्डों को छह महीने के भीतर सभी वक्फ संपत्तियों का डिजिटल पंजीकरण पूरा करने का निर्देश दिया था. लेकिन तय समय-सीमा बीत गई, फिर छह महीने और बढ़े, इसके बावजूद तस्वीर अब भी अधूरी है.
- कुल वक्फ संपत्तियां – 8,72,352
- अंतिम मंजूरी – 5,43,597 (62%)
- सत्यापन में लंबित – 69,257
- अप्रूवर के पास – 17,979
- शुरू हुईं लेकिन जमा नहीं – 49,899
- सुधार के लिए वापस – 85,738
- सिस्टम में दर्ज – 7,66,470
- करीब 1.06 लाख संपत्तियों का रिकॉर्ड अब तक पोर्टल पर नहीं
अब मुस्लिम संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं की पोर्टल में काफ़ी दिक्कत है. सरकार इसमें बदलाव करके रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी मुत्तलवी से हटाकर वक्फ बोर्ड को दे. संगठन सरकार में इरादे पर ही सवाल उठा रही है.
एक तरफ मुतवल्ली और वक्फ से जुड़े लोग तकनीकी दिक्कतों, दस्तावेजों की कमी और पोर्टल की खामियों का हवाला दे रहे हैं. दूसरी तरफ केंद्र सरकार का संदेश भी कम सख्त नहीं है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू साफ कह चुके हैं कि जो वक्फ संपत्तियां दर्ज नहीं होंगी, उनका भविष्य अच्छा नहीं दिखता. हालांकि, आधिकारिक तौर पर मंत्री पहले ही कह चुके है कि राज्यों को भी पंजीकरण में सहयोग करना चाहिए. लेकिन फिलहाल समय-सीमा फिर बढ़ेगी या नहीं, इस पर मंत्रालय ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है.
अब इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है. बीजेपी का कहना है कि जिस संपत्ति के वैध दस्तावेज ही नहीं हैं, उसे वक्फ कैसे माना जाए? पार्टी का तर्क है कि जिन संपत्तियों का पंजीकरण नहीं है या जिनके कागज पूरे नहीं हैं, उन्हें अवैध मानते हुए सरकार को कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए.
वक्फ संशोधन कानून पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती का सामना कर रहा है और 65 से ज्यादा याचिकाएं लंबित हैं. कई राज्यों में नए वक्फ बोर्डों का गठन भी अभी पूरा नहीं हुआ है, जिससे पंजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई है.
यानी एक तरफ पोर्टल पर लाखों संपत्तियों का रिकॉर्ड अब भी अधूरा है, दूसरी तरफ उनके भविष्य पर सियासत और कानूनी बहस दोनों जारी हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब 1.06 लाख ऐसी वक्फ संपत्तियों का क्या होगा, जिनका रिकॉर्ड आज तक UMEED पोर्टल तक नहीं पहुंचा? क्या मंत्रालय नई डेडलाइन देगा, कोई नया दिशा-निर्देश जारी करेगा या फिर इनका भविष्य अदालत और सरकार के अगले कदम से तय होगा? फिलहाल इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है, लेकिन बहस लगातार तेज होती जा रही है.
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