14 और 15 जुलाई 2026 की रात को मणिपुर के सेनापति शहर में असम राइफल्स कैंप के खिलाफ अचानक भीड़ ने पथराव और आगजनी कर दिया. यह घटना ओलोंग इलाके में एक शिविर के पास सुरक्षा बलों की रूटीन गश्त के बाद किया गया.
लोकल लोगों के बीच इस बात की अफवाह फैली कि असम राइफल्स ने सेनापति जिले के ओलोंग स्थित एनएससीएन-आईएम के शिविर की घेराबंदी शुरू कर दी है. इस खबर के बाद भीड़ ने उग्र होकर असम राइफल्स के जवानों के ऊपर हमला कर दिया और असम राइफल्स के टीसीपी गेट में आग लगा दी.
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इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने असम राइफल के वाहनों को भी पलटने और उनमें आग लगाने का प्रयास किया. असम राइफल और मणिपुर पुलिस के जवानों ने स्थिति को नियंत्रण में किया. इस तनाव के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पूरे इलाके में सुरक्षा बल कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं.
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आपको बता दें कि असम राइफल्स को एक खुफिया इनपुट मिला था कि ओकलांग में नामित एनएससीएन शिविर के नजदीक मकुइलोंगडी में आर्म्स से लैश कैडरों की जानकरीं मिली, जिसके बाद असम राइफल की तरफ से गश्ती और तलाशी अभियान शुरू किया गया था.
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ऑपरेशन के दौरान, मकुइलोंगडी और ओकलोंग गांवों के पास पहुंचने वाली असम राइफल की बटालियन को लोकल लोग को जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने रोक दिया.
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असम राइफल के एक बड़े अधिकारी ने न्यूज24 को बताया कि जैसे-जैसे तनाव बढ़ता गया, शहर में एक बड़ी भीड़ इकट्ठा होने और असम राइफल कैंप की ओर मार्च करने की तैयारी की खबरें सामने आईं.
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असम राइफल्स के पीछे हटने के बावजूद, एक बड़ी भीड़ शिविर में पहुंची, पथराव किया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और आगजनी की कोशिश की. हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने और आगे बढ़ने से रोकने के लिए, खाली राउंड और आंसू-गैस ग्रेनेड चलाकर न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया.
कानून और व्यवस्था बहाल करने में सहायता के लिए सेनापति पुलिस और सीआरपीएफ को तुरंत तैनात किया गया.
बाद में पीछे हटते समय भीड़ ने असम राइफल्स के वाहनों में तोड़फोड़ की और उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया. एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि दो ट्रकों को पलट कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया. हिंसा के दौरान एक सिविल कार भी जला दी गई. सुरक्षा बलों, मणिपुर पुलिस और सीआरपीएफ ने फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है.