भारत के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बार फिर कानूनी बहस छिड़ गई है. केंद्र सरकार द्वारा स्कूलों में इस गीत के सभी छह अंतरों को अनिवार्य रूप से गाने के निर्देश को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. इस जनहित याचिका ने राष्ट्रीय पहचान और व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है. दरअसल, पिछले महीने केंद्र सरकार ने एक नई प्रोटोकॉल एडवाइजरी जारी की थी. इसके तहत स्कूलों में होने वाली दैनिक प्रार्थना सभाओं में ‘वंदे मातरम’ के मूल स्वरूप यानी सभी छह अंतरों का गायन अनिवार्य कर दिया गया है. इससे पहले आमतौर पर गीत के शुरुआती दो अंतरों को ही औपचारिक रूप से गाया जाता रहा है.
अदालत में दी गई दलीलें
अधिवक्ता सोमशेखर राजवंशी द्वारा दायर इस याचिका में केंद्र के निर्देश को ‘असंवैधानिक’ बताया गया है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि वंदे मातरम के बाद के चार अंतरे धार्मिक प्रकृति के हैं. याचिका में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि गीत के पांचवें अंतरे में हिंदू देवी-देवताओं मां दुर्गा, लक्ष्मी और वाणी (सरस्वती) का आह्वान किया गया है. याचिकाकर्ता के अनुसार, किसी भी सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूल में बच्चों को ऐसी प्रार्थना के लिए विवश करना संविधान के अनुच्छेद 25-28 का उल्लंघन है, जो अंतरात्मा की स्वतंत्रता और सरकारी संस्थानों में धार्मिक शिक्षा पर रोक लगाते हैं. साथ ही इसे अनुच्छेद 14 के भी विरुद्ध बताया गया है.
याचिकाकर्ता ने गीत के पहले दो अंतरों पर कोई आपत्ति नहीं जताई है. कोर्ट को बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी देश को एकजुट करने के लिए केवल शुरुआती दो अंतरों को ही राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता दी गई थी, क्योंकि वे पूरी तरह देशभक्ति पर आधारित हैं और उनमें किसी विशिष्ट धार्मिक प्रतीक का प्रयोग नहीं है.
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने दी यह दलील
मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति सीएम पूनाचा की खंडपीठ ने इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई की. सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अरविंद कामथ ने दलील दी कि इसी तरह की एक याचिका को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी तत्काल उपलब्ध न होने के कारण हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 9 अप्रैल के लिए तय की है.
याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस निर्देश के मनोवैज्ञानिक प्रभाव की जांच करें. अब सभी की नजरें 9 अप्रैल पर टिकी हैं, जब कोर्ट तय करेगा कि राष्ट्रगीत की यह अनिवार्यता संवैधानिक दायरे में है या नहीं.
संबंधित खबरें
'लोकतंत्र को कर रहे हैं बर्बाद', ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी का बड़ा बयान, 15000 वोटर्स के नाम हटाने का आरोप
1 hr agoअब कैसी है कैप्टन स्मित मच्छार की तबीयत? UAE की इंडियन एंबेसी ने दिया हेल्थ अपडेट
1 hr agoस्मिथ मच्छार की बहादुरी ने दिलाई इंडियन नैनी की याद, 9/11 हमले में बचाई थी 2 साल के इजरायली बच्चे की जान
4 hrs agoCEC ज्ञानेश कुमार और SIR विवाद के बीच मुख्य चुनाव अधिकारी ने मांगी VRS, बोले-निजी फैसला
5 hrs agoपेंडिंग हैं चालान तो न बनेगा PUC और न रिन्यू होगा ड्राइविंग लाइसेंस, सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश; ब्लैकलिस्ट होंगी गाड़ियां
8 hrs agoबचपन में कैसे थे कैप्टन स्मित मच्छार, दोस्त ने याद किए पुराने दिन; पड़ोसियों ने बताए परिवार के हाल
8 hrs ago'आसमान में आपको कौन बचाएगा?', Flydubai के पायलट स्मित मच्छार का पुराना VIDEO हो रहा वायरल
9 hrs agoफॉर्म-6 में चेंज का आदेश किसने दिया? राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से पूछा सवाल
9 hrs ago'INDIA' महाबैठक में सोनिया गांधी की एंट्री ने क्यों चौंकाया? हॉल में कैसे मची अफरातफरी
10 hrs agoCBSE Datesheet 2027: 10वीं, 12वीं के टाइम टेबल को लेकर आया अपडेट, इस डायरेक्ट लिंक से करें डाउनलोड
10 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines