US Iran peace deal: मिडिल ईस्ट में महीनों से जारी तनाव और युद्ध के बीच पूरी दुनिया के लिए एक बहुत राहत भरी खबर आ रही है. अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है. इस बात का बड़ा संकेत खुद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत की धरती से दिया है. नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मार्को रुबियो ने कहा, "पिछले 48 घंटों में दोनों देशों के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. इस बात की पूरी संभावना है कि अगले कुछ ही घंटों में दुनिया को एक बहुत अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है." रुबियो ने साफ किया कि दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और वैश्विक ऊर्जा संकट की वजह बने 'हॉरमुज जलडमरूमध्य' के रास्ते को फिर से खोलने के लिए एक सहमति पत्र पर काम चल रहा है.
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इससे ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस बात की पुष्टि की थी. ट्रंप ने लिखा कि ईरान के साथ शांति समझौते को काफी हद तक अंतिम रूप दिया जा चुका है और केवल अंतिम बारीकियों पर चर्चा चल रही है, जिसका एलान जल्द किया जाएगा. इस संभावित समझौते के तहत हॉरमुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से व्यापारिक जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा, जिसे फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद ब्लॉक कर दिया गया था. इसके बदले में ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की बिक्री करने की छूट मिल सकती है और उसके फ्रीज किए गए फंड को भी जारी किया जा सकता है.
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हालांकि, बातचीत के बीच कुछ पेच भी फंसे हुए हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को सौंपने पर सहमत हो गया है, लेकिन ईरानी सूत्रों ने इस दावे का खंडन किया है. ईरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा इस शुरुआती 60 दिनों के युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं है, बल्कि इस पर भविष्य में बातचीत होगी. फिलहाल, दुनिया की नजरें वाशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं क्योंकि अगले कुछ घंटे वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं.
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