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पैलेट गन के इस्तेमाल पर मचा बवाल, कितनी खतरनाक होती है ये बंदूक? जानिए कैसे करती है काम

सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल की गई पैलेट गन से घायल प्रदर्शनकारियों की दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आईं. प्रदर्शन में शामिल मध्य प्रदेश के इरशाद मंसूरी की आंख की रोशनी भी जाने का खतरा बना हुआ है.

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया, जब 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद की तरफ मार्च शुरू किया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प भी हुई, सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए जिनमें पुलिस की जवाबी कार्रवाई देखी गई. इस बीच ऐसे भी दावे किए गए कि प्रोटेस्टटर्स को संसद तक पहुंचने रोकने के लिए तैनात सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया. सूत्रों के हवाले से कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि आरएएफ के जवान ने पैलेट गन से 7 राउंड फायरिंग की थी.

पैलेट गन क्या होती है?


पैलेट गन को लेकर देश में मचे बवाल के बीच अगर आप ये नहीं जानते कि आखिर ये बंदूक क्या बला है और ये काम कैसे करती है, तो आज हम आपको इसके बारे में डिटेल जानकारी देंगे. पैलेट गन को असल में एयर पावर्ड वैपन के तौर पर भी जाना जाता है. पैलेट गन से छोटे-छोटे प्रोजेक्टाइल, यानी पेलेट्स फायर किए जाते हैं. ये गन सबसे पहले जम्मू-कश्मीर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस्तेमाल करने को लेकर चर्चा में आई थी. आखिरी बार इसे किसान आंदोलन के दौरान इस्तेमाल किया गया था, हालांकि तब भी सुरक्षबलों ने ऐसे किसी भी दावे को खारिज कर दिया था.

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कितने प्रकार की होती हैं पैलेट गन?


सुरक्षाबलों के पास मुख्य रूप से तीन तरह के पैलेट गन्स होती हैं, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग परिस्थियों में किया जाता है.

  1. एयर पिस्टल पैलेट गन: इस तरह की पैलेट बंदूकें हैंडगन जैसे आकार की होती हैं, जो स्प्रिंग, प्रेशर्ड गैस या CO2 से चलते हैं. अक्सर ये पैलेट गन टारगेट प्रैक्टिस में काम आते हैं.
  2. एयर राइफल: इस तरह की पैलेट गन लंबी बैरल वाली होती है, जिनसे सटीक निशाना लगाना आसान हो जाता है. इन बंदूकों का इस्तेमाल छोटे गेम हंटिंग और शॉटिंग स्पोर्ट के लिए किया जाता है.
  3. क्राउड-कंट्रोल शॉटगन: धरना प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल होने वाली इस तरह की पैलेट गन्स 12 गेज के पंप-एक्शन वेपन होते हैं, जिनमें कई छोटे पेलेट वाले कार्ट्रिज लगते हैं. भीड़ को नियंत्रित और तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बल इन्हीं का इस्तेमाल करते हैं.

कितनी खतरनाक होती हैं पैलेट गन्स?


सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल की गई पैलेट गन से घायल प्रदर्शनकारियों की दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आईं. प्रदर्शन में शामिल मध्य प्रदेश के इरशाद मंसूरी की आंख की रोशनी भी जाने का खतरा बना हुआ है. हालांकि पैलेट गन के इतिहास में अब तक इस बंदूक से किसी के मौत की सूचना तो नहीं मिली है, लेकिन शरीर पर इससे काफी गहरे जख्म हो सकते हैं. सोशल मीडिया पर दो अन्य प्रदर्शनकारियों के भी पैलेट गन से घायल होने की जानकारी सामने आई है. पुलिस अब तक इन दावों का खंडन की कर रही है.

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कितनी दूरी से फायर करना अनिवार्य?


नियमों के मुताबिक पैलेट गन को कम से कम 500 मीटर की दूसरी से टार्गेट पर फायर किया जा सकता है, लेकिन करीब से इसे इस्तेमाल करने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है. कई बार राज्य में प्रदर्शनों या दंगों के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. दिल्ली प्रोटेस्ट में पुलिस और दिल्ली प्रशासन ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है, लेकिन पैलेट गन और शॉक बैटन RAF (रैपिड एक्शन फोर्स) के गियर का हिस्सा है. इसलिए मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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