खबर की मुख्य बातें:-
- संयुक्त राष्ट्र (UN) की नई रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ा अंतर सामने आया.
- भारत में पिछले दो दशकों में कुपोषित लोगों की संख्या में बड़ी कमी दर्ज की गई है.
- पाकिस्तान में इसी दौरान भुखमरी और कुपोषण से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ी है.
- रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भी भूख के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है.
भारत और पाकिस्तान के बीच अंतर को लेकर बड़ी रिपोर्ट सामने आई है, जिसकी जानकारी होना आपके लिए जरूरी है. दरअसल, संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया 'द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड' की एक रिपोर्ट में दोनों देशों के खाद्य सुरक्षा को लेकर बहुत बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिसने पाकिस्तान के हालात का बड़ा जायजा दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों में जहां भारत ने कुपोषण और भुखमरी को कम करने की दिशा में बड़े कदम उठाकर प्रगति की है, वहीं पाकिस्तान में कुपोषित लोगों की संख्या में इजाफा देखने को मिला है. रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कई देशों ने खाद्य सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन सभी देशों ने इसमें बेहतरी नहीं हासिल कर पाई है. भारत-पाकिस्तान ने साथ में आजादी हासिल की थी, लेकिन आज दोनों के बीच अंतर बड़ा देखने को मिला है, जिसने पाकिस्तान को चर्चा का विषय बना दिया है.
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दुनिया में क्या है भुखमरी का हाल?
UN की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में भुखमरी के आंकड़ों में अच्छा बदलाव देखने को मिला है, जो बताती है कि कई देशों ने नागरिकों को बेहतर जिंदगी देने और मूल्य जरूरतों को पूरा करने में काम कर रही है. इसी मेहनत के कारण दुनियाभर में भुखमरी के आंकड़ों में लगातार तीसरे साल गिरावट दर्ज की गई है. आंकड़े बताते हैं कि साल 2022 में जहां दुनिया की 8.6% आबादी भुखमरी का शिकार थी, वहीं 2025 में यह घटकर 7.8% (लगभग 64.5 करोड़ लोग) रह गई है.
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भारत में कैसे हैं कुपोषण के मामले?
आजादी के बाद से भारत की आबादी में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है, ऐसे में भुखमरी के खिलाफ जंग आसान नहीं था. लेकिन इस जंग में जीत हासिल करने के लिए कई बड़ी योजनाओं और कदम उठाए गए, जिसका असर ये रहा है कि साल 2004-2006 के दौरान भारत में जो 24.39 करोड़ लोग कुपोषित से जूझ रहे थे, साल 2023-2025 तक उनकी संख्या घटकर 14.25 करोड़ रह गई है. यानी भारत ने लगभग 41.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की है. इसके अलावा, पौष्टिक भोजन उपलब्ध न होने की समस्या से जूझने वाले लोगों की संख्या में भी बड़ी गिरावट आई है.
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भारत में कई योजनाओं पर तेजी से चल रहा काम
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारत की 35.5% आबादी यानी लगभग 49.5 करोड़ लोग पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं. हालांकि, साल 2017 के आंकड़ों को देखें तो ऐसे लोगों की संख्या 81 करोड़ थी, जिनकी पहुंच पौष्टिक आहार तक नहीं थी. यानी पिछले आठ सालों में करीब 32 करोड़ लोग इस स्थिति से बाहर निकले हैं. इसके बावजूद बड़ी आबादी होने के वजह से भारत आज भी दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां सबसे ज्यादा लोग पौष्टिक भोजन खरीद नहीं पाते हैं.
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पाकिस्तान में बढ़ती भुखमरी का क्या है कारण
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में स्थिति इसके भारत की तुलना में काफी अलग दिखाई दी. साल 2004-2006 के दौरान जहां लगभग 2.96 करोड़ लोग कुपोषण का शिकार थे, वहीं साल 2023-2025 के दौरान यह संख्या बढ़कर करीब 4.04 करोड़ पहुंच गई. यानी करीब 36.5 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है. इसी तरह पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं जुटा पाने वाले लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ी है. रिपोर्ट यह संकेत देती है कि आर्थिक चुनौतियां, महंगाई, खाद्य संकट और अन्य समस्याओं का असर आम लोगों की जीवनशैली पर साफ दिखाई दे रहा है. माना जा रहा है कि पाकिस्तान की सरकार का सिर्फ युद्ध पर ध्यान रहना. उनकी जनता को बड़ी मुसीबत में धकेल रहा है, जिसपर वक्त रहते काबू पाना काफी जरूरी है.
दुनियाभर में क्या है भुखमरी के आंकड़े?
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि पूरी दुनिया में भूख से प्रभावित लोगों की संख्या में कमी दर्ज की गई है. साल 2022 में जहां वैश्विक स्तर पर लगभग 8.6 प्रतिशत आबादी भुखमरी से प्रभावित थी, वहीं साल 2025 तक यह आंकड़ा घटकर करीब 7.8 प्रतिशत रह गया है. इसमें एशिया में सबसे ज्यादा सुधार देखने को मिला है.
मुख्य निष्कर्ष:- संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारत ने कुपोषण और भुखमरी कम करने की दिशा में शानदार प्रगति की है, जबकि पाकिस्तान में कुपोषित लोगों की संख्या बढ़ी है. इसका सीधा मतलब है कि दोनों देशों में सरकारी योजनाओं और खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम का क्या हाल है.
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