ब्रिटेन ने होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए ग्लोबल समिट बुलाई है. इसमें भारत समेत करीब 35 देश शामिल हुए. भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के विदेश सचिव विक्रम मिसरी इस बैठक में शामिल हुए हैं.

वार्ता से पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि हम ईरान और अन्य देशों के संपर्क में हैं ताकि ताकि हमारे जहाज आसानी से और सुरक्षित आ जा सकें.

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न्यूज एजेंसी एएनआई ने जायसवाल के हवाले से कहा है, 'पिछले कुछ दिनों में हुई बातचीत की वजह से ही हमारे छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार करने में कामयाब रहे. और हम संबंधित पक्षों के संपर्क में लगातार बने हुए हैं.'

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न्यूज एजेंसी एएनआई ने जायसवाल के हवाले से कहा है, 'पिछले कुछ दिनों में हुई बातचीत की वजह से ही हमारे छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार करने में कामयाब रहे. और हम संबंधित पक्षों के संपर्क में लगातार बने हुए हैं.'

बता दें, बुधवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस ग्लोबल समिट को लेकर कहा था. इससे एक दिन पहले ट्रंप ने सीधे तौर पर ब्रिटेन को दो टूक लहजे में कहा था कि अगर ब्रिटेन इस युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं देता, तो भविष्य में अमेरिका उसकी कोई मदद नहीं करेगा. ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा था कि ब्रिटेन को अगर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल लेना है तो वह खुद वहां जाकर उसे खुलवाएं. उन्होंने साथ ही कहा था कि अगर होर्मुज नहीं खुलवा सकते तो अमेरिका से तेल खरीद सकते हैं.

ट्रंप के इस बयान का जवाब देते हुए अगले दिन पीएम स्टार्मर ने कहा कि ये हमारा युद्ध नहीं है और होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए 35 देशों के साथ ग्लोबल समिट करेंगे.

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क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की इकॉनमी के लिए बहुत जरूरी है. दुनिया की 20% एनर्जी सप्लाई इसी संकरे रूट से होकर गुजरती है. इस रूट को ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद बंद कर दिया था. ईरान ने किसी भी ऑयल टैंकर को यहां से नहीं निकलने दिया. जिसकी वजह से करीब 2000 टैंकर यहां फंसे हुए हैं. हालांकि, कुछ देशों के टैंकरों को बिना किसी रुकावट के आने जाने दिया गया. इनमें भारत के भी कुछ टैंकर शामिल हैं.

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भारत की बात करें तो लगभग 40% क्रूड ऑयल, 50% लिक्विफाइड नेचुरल गैस, और 80% से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) इसी रास्ते से होकर आता है.