Heavy Rain Alert Across North India: आने वाले दिनों में उत्तर भारत में मानसून की जबरदस्त गतिविधि देखने को मिल सकती है, क्योंकि मौसम के 2 बड़े सिस्टम आपस में मिल रहे हैं. इससे बड़े पैमाने पर बारिश, आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस मेल से तापमान में गिरावट आ सकती है और कई उत्तरी राज्यों में बारिश तेज हो सकती है.
---विज्ञापन---
'डीप डिप्रेशन' का असर
पहला सिस्टम एक 'डीप डिप्रेशन' (गहरा कम दबाव का क्षेत्र) है जो उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना था. 27 और 28 जुलाई के बीच दीघा के पास पश्चिम बंगाल-ओडिशा तट को पार करने के बाद, ये ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ से होकर गुजरा, जिससे कई इलाकों में भारी बारिश हुई. 29 जुलाई तक, ये वेदर सिस्टम मध्य छत्तीसगढ़ और रायगढ़ के पास ओडिशा के उत्तरी अंदरूनी इलाकों में केंद्रित था और पश्चिम की ओर पूर्वी मध्य प्रदेश की तरफ बढ़ रहा था.
---विज्ञापन---
'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' का भी इफेक्ट
हालांकि जमीन पर आने के बाद इस डिप्रेशन की ताकत धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन ये मानसून के बहाव में भारी मात्रा में नमी पहुंचा रहा है. उम्मीद है कि ये नमी पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में अभी सक्रिय एक नए 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' (पश्चिमी विक्षोभ) के साथ मिल जाएगी. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आमतौर पर भूमध्य सागर से आते हैं और अक्सर उत्तर-पश्चिमी भारत और हिमालयी राज्यों में बारिश बढ़ाते हैं.
---विज्ञापन---
इन राज्यों में भारी बारिश की आशंका
इन दोनों वेदर सिस्टम के मेल से अगले कुछ दिनों में दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, यूपी और राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश बढ़ने की उम्मीद है. बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं भी चल सकती हैं. इस बीच, छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है, जबकि मध्य प्रदेश, विदर्भ और तेलंगाना में भी जोरदार बारिश हो सकती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश दर्ज की जा सकती है.
---विज्ञापन---
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून के ये सक्रिय हालात दक्षिण-पश्चिम मानसून को और बेहतर बना सकती है, जो जून में कमजोर शुरुआत के बाद जुलाई में काफी बेहतर हुआ था. हालांकि पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में मौसमी बारिश अभी भी नॉर्मल से कम है, लेकिन हाल की वेदर एक्टिविटीज ने कुल बारिश की कमी को कम किया है और कई मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों में हालात बेहतर किए हैं.
---विज्ञापन---