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15000 करोड़ खर्च, 600 मेगावाट बिजली, 6 राज्य… क्या है किशाऊ डैम प्रोजेक्ट? आज 6 राज्य साइन करेंगे MoU

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर किशाऊ डैम बनाया जाएगा, जो करीब 15000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है और इससे दिल्ली समेत 6 राज्यों का जलसंकट खत्म होगा. सिंचाई के लिए पानी मिलेगी और बिजली उत्पादन भी होगा.

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किशाऊ डैम प्रोजेक्ट साल 2008 से अटका हुआ था. (Credit- X)

केंद्र सरकार आज एक और जल बंटवारा विवाद सुलझाने जा रही है. आज हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बीच यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी टोंस नदी के पानी को लेकर चल रहा दशकों पुराना विवाद आज खत्म हो जाएगा. आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल की मौजूदगी में उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ डैम प्रोजेक्ट के MoU पर साइन होंगे. इस दौरान दिल्ली के कर्तव्य भवन में दोपहर 3 बजे 6 राज्यों राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे और सभी MoU पर साइन करेंगे.

15000 करोड़ रुपये का नेशनल प्रोजेक्ट

किशाऊ डैम प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व की 15000 करोड़ रुपये की जल विद्युत और जल भंडारण परियोजना है. इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 660 मेगावाट होगी और इस पर 165 मेगावाट की 4 बिजली यूनिट लगेंगी. इस प्रोजेक्ट का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाएगी और बाकी 10 प्रतिशत खर्च 6 राज्य मिलकर उठाएंगे. करीब 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट का ग्रेविटी डैम बनेगा, जिनके बाद यह बांध टिहरी बांध के बाद एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध बना जाएगा. इस डैम में 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी स्टोर होगा और सालाना 1379 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होगी और यह बिजली उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच बराबर बांटेगी.

किशाऊ डैम प्रोजेक्ट का मकसद क्या है?

बता दें कि किशाऊ डैम प्रोजेक्ट का मकसद उत्तर भारत में पेयजल और सिंचाई के संकट को दूर करना है. स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करना है. जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन इसके मुख्य उद्देश्य हैं. डैम बनने से 97000 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि योग्य भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा. लेकिन इस प्रोजेक्ट के दायरे में हिमाचल प्रदेश के 8 और उत्तराखंड के 9 गांव आएंगे. हिमाचल की 1498 हेक्टेयर और उत्तराखंड की 1452 हेक्टेयर जमीन डूब जाएगी. उत्तराखंड के 5500 लोगों और हिमाचल के 2092 लोगों का पुनर्वास करना होगा. यानी प्रोजेक्ट से जहां जल बंटवारा विवाद सुलझेगा, वहीं कई गांवों-लोगों का नुकसान होगा.

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डैम के पानी-बिजली का बंटवारा कैसे होगा?

किशाऊ डैम से सभी 6 राज्यों का फायदा होगा. हिमाचल इस डैम के लिए अपने हिस्से का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं है. इसलिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के हस्तक्षेप और राज्यों की आपसी सहमति से नया फॉर्मूला तय किया गया है. जिसके तहत हिमाचल के हिस्से के खर्च का वहन दिल्ली और राजस्थान करेंगे. बदले में हिमाचल इन दोनों राज्यों को पानी उपलब्ध कराएगा. डैम से हिमाचल प्रदेश को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी, जिससे प्रदेश को 600 करोड़ रुपये की सालाना आमदनी हो सकती है. हिमाचल की वित्तीय आपत्ति के कारण ही प्रोजेक्ट अटका था. डैम से उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में सिंचाई और पेयजल की किल्लत दूर होगी.

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2008 में नेशनल डैम प्रोजेक्ट घोषित हुआ

किशाऊ डैम प्रोजेक्ट को साल 2008 में नेशनल प्रोजेक्ट घोषित किया गया था. लेकिन इसके पानी के बंटवारे, निर्माण के खर्च के वहन संबंधी आपत्तियों के कारण प्रोजेक्ट साइन नहीं हो पा रहा था. जून 2026 में केंद्र सरकार की पहल पर 6 राज्यों के बीच प्रोजेक्ट को लेकर सहमति बनी और MoU साइन होने का रास्ता साफ हुआ. प्रोजेक्ट का मकसद बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि ऊपरी यमुना बेसिन में पानी का भंडारण, और यमुना नदी में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ाना है. केंद्र सरकार अब से पहले बिहार-झारखंड के बीच 25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद निपटा चुकी है. मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र का नर्मदा नदी जल विवाद और राजस्थान-हरियाणा का यमुना नदी जल विवाद सुलझाया.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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