एक तरफ तो कई देश में अपने हथियार और पैसा दूसरे देश के साथ युद्ध करने में खत्म कर रहे है तो वहीं भारतीय रक्षा मंत्रालय अपनी सेना को मजबूत करने के साथ ही कमाई में भी झंडे गाड़ रही है. भारतीय रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य है कि साल 2047 तक देश की तीनों सेना को पूरी तरह से आत्मनिर्भर करने का है और इसके लिए लगातार प्रयास भी जारी है. इतना ही नहीं भारतीय रक्षा मंत्रालय आत्मनिर्भर भारत से बने अपने हथियारों को भी बेचने के लिए विदेश में पैर फैला रही है.

ताजा आंकड़ा जारी करते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि साल 2025-2026 में बहुत ही बढ़िया कमाई की है. यानी आंकड़ा ₹38,424 करोड़ की कमाई के लेवल तक पहुंच गया है.

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आपको बता दें कि भारतीय रक्षा मंत्रालय की बढ़ती धन राशि का यह प्रमाण विश्व स्तर पर खुद को अपनी ताकत बताने से लेकर है. सोशल मीडिया के जरिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंकड़े जारी करते हुए बताया है कि मौजूदा वित्त वर्ष में रक्षा निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 62.66 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है. मूल्य के लिहाज से देखा जाए तो यह ₹14,802 करोड़ का बड़ा उछाल है.

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस अहम उपलब्धि की जानकारी देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात की एक प्रभावशाली सफलता की कहानी लिख रहा है. उन्होंने कहा कि निर्यात में आया यह भारी उछाल भारत की स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत विनिर्माण ताकत में बढ़ते वैश्विक भरोसे को स्पष्ट रूप से दर्शाता है.

किन क्षेत्रों में बढ़ी हिस्सेदारी और भागीदारी

  • डीपीएसयू की हिस्सेदारी: रक्षा निर्यात में इसका योगदान 54.84 प्रतिशत रहा है.
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: वहीं, निजी उद्योग 45.16 प्रतिशत रहा है.
  • भविष्य की संभावनाएं: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक भविष्य में इसके उत्पादन मूल्य का 50 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है.

डिफेंस डायलॉग में रक्षा मंत्री ने बताया था कि सरकार के प्रयासों से वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.50 लाख करोड़ के पार चला गया था और तब निर्यात लगभग ₹24,000 करोड़ के स्तर पर था.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक, भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियां अब पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड में ही बन रही हैं. इनकी डिजाइनिंग से लेकर इंजीनियरिंग, निर्माण और जीवनचक्र समर्थन तक सब कुछ स्वदेशी है.

राजनाथ सिंह ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा, आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक नारा नहीं है; यह एक व्यावहारिक वास्तविकता के रूप में स्थापित हो रही है. यानी बिल्डर्स नेवी कोई नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है.

न्यूज 24 को जानकारी देते हुए रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य साल 2030 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का है.