TMC Congress Merger: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मचे घमासान और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी अंदरूनी टूट की खबरों के बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस आलाकमान की मुलाकातों ने देश का सियासी पारा गरमा दिया है. पिछले कुछ दिनों में ममता बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी से दो बार मुलाकात की, वहीं उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से चर्चा की. इन हाई-प्रोफाइल मुलाकातों के बाद सियासी गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई थीं कि क्या अब टीएमसी का कांग्रेस में विलय होने जा रहा है? अब इन तमाम दावों और अफवाहों पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से बेहद अहम और साफ बयान सामने आया है.
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कांग्रेस ने विलय की खबरों को बताया 'बेबुनियाद अफवाह'
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन सभी अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि टीएमसी के कांग्रेस में विलय की खबरें पूरी तरह से झूठी और बेबुनियाद अफवाहें हैं. वेणुगोपाल ने बताया कि पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है.
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तो फिर क्यों हुई सोनिया और ममता की मुलाकात?
केसी वेणुगोपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोनिया गांधी-ममता बनर्जी और राहुल गांधी-अभिषेक बनर्जी की मुलाकातों का असली मकसद भी साफ किया. उन्होंने कहा कि यह मुलाकातें पूरी तरह से एक सामान्य प्रक्रिया (रूटीन बैठकें) थीं. वेणुगोपाल ने जोर देते हुए कहा, "इन मुलाकातों का मुख्य मकसद विपक्ष को एकजुट करना है. एक मजबूत और एकजुट मोर्चा तैयार करके इस अलोकतांत्रिक सरकार के खिलाफ लड़ाई को और अधिक ताकतवर बनाना ही इस बातचीत का असली उद्देश्य था."
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गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष की खबरें आ रही थीं, जिसके बाद कई विधायकों और सांसदों के बागी होने की बातें सामने आईं. इसी सियासी संकट के बीच जब ममता बनर्जी दिल्ली पहुंचीं और सोनिया गांधी से मिलीं, तो चर्चाएं शुरू हो गईं कि ममता को कांग्रेस उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को महासचिव का पद ऑफर किया गया है.
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बहरहाल, अब कांग्रेस के आधिकारिक बयान ने इन सभी कयासों पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है और साफ कर दिया है कि यह मुलाक़ातें केवल सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए थीं, न कि किसी विलय के लिए.
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