ऑपरेशन सिंदूर और मिडिल ईस्ट की लड़ाई को देखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रहा है, इसी सिलसिले में अब भारत की तीनों सेना के लिए आत्मनिर्भर भारत से बने स्वदेशी नेगेव मशीन गन को बनाने का लक्ष्य तैयार कर लिया गया है, क्योंकि इस तरह के मशीन गन के लिए इजरायल पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब स्वदेशी तरीके से इसका निर्माण करने का फैसला लिया गया है. सेना की तरफ से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की टीम बनाई गई थी और उसमे से लिए फैसले के बाद एमईपीआरओलाइट की एमईपीआरओ एक्स6 टेलीस्कोपिक साइट को नेगेव मशीन गनों के लिए आधिकारिक डे-ऑप्टिक के रूप में चुना गया है. इस नई तकनीक से दुश्मन की पहचान दूर से ही कर ली जाएगी,यानी भारतीय सैनिकों को लंबी दूरी पर लक्ष्य पहचानने और सटीक तरीके से निशाना साधने में इस नई टेक्नोलॉजी से मदद मिलेगी. आपको बता दे कि इसका इस्तेमाल 7.62 मिमी नेगेव लाइट मशीन गन्स में दूर के लक्ष्यों को सटीक रूप से भेदने के लिए किया जाएगा .

एमईपीआरओ एक्स6 टेलीस्कोपिक साइट को सेना के कई स्तर पर यूजर रेंटिंग, फील्ड ट्रायल और फॉरेस्ट परीक्षण किया गया था. इन परीक्षणों में विश्वसनीयता, मजबूती, सटीकता और कठिन परिस्थितियों में संचालन क्षमता जैसे मानकों को परखा गया. इन सभी कसौटियों पर एमईपीआरओ एक्स6 खरा उतरा और जिसके बाद इसे चुना गया.

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एमईपीआरओ एक्स6 एक फिक्स्ड 6x मैग्निफिकेशन वाली टेलीस्कोपिक की खासियत

  1. लंबी दूरी पर लक्ष्य की बेहतर पहचान करना किसी भी मौसम में
  2. तेज और सटीक टारगेट एक्विजिशन किसी भी मौसम में
  3. चौड़ा फील्ड ऑफ व्यू लक्ष्य चाहे कैसा भी हो
  4. खराब मौसम और युद्ध की परिस्थितियों में भरोसेमंद साथ देने वाला बनेगा यह हथियार
  5. मजबूत और बेहतरीन डिजाइन

यह ऑप्टिकल साइट भारतीय सेना की 7.62 मिमी नेगेव लाइट मशीन गनों पर लगाई जाएगी, जो फिलहाल थल सेना में तैनात होगी.

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आधुनिक युद्ध में केवल हथियार ही नहीं, बल्कि लक्ष्य की पहचान और सटीक निशाना लगाने वाली तकनीक भी निर्णायक भूमिका निभाती है. एमईपीआरओ एक्स6 जैसी उन्नत ऑप्टिकल साइट के शामिल होने से भारतीय सेना की नेगेव मशीन गनों की ताकत बढ़ेगी और सैनिकों को भविष्य के युद्ध के समय ज्यादा से ज्यादा मशीन गन मिलेगी, जिससे की दुश्मन के ठिकानों पर अटैक करने में भारतीय सेना को मदद मिल पाएगी.

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