आत्मनिर्भर भारत के तहत बनाई गई ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत दुश्मन देश के साथ ही पूरी दुनिया देख रही है. यही वजह है कि लगातार इसकी डिमांड आनी शुरी हो गई. भारतीय रक्षा मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर थाईलैंड ने भी अपनी दिलचस्पी दिखाई है. युद्ध के दौरान इस मिसाइल के सिर्फ खड़े होते देखकर के ही दुश्मन अपनी जान बचाने के लिए पीछे हट जाते है जिसका उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर के समय में देखा जा चुका है. इसकी ताकत को देखते हुए थाईलैंड इस खतरनाक एंटी-शिप मिसाइल को खरीदने की तैयारी कर रहा है.
बता दें, इंडोनेशिया से युद्ध के बाद थाईलैंड अपनी सेना को ज्यादा से ज्यादा आधुनिक करने में जुटा हुआ है. अपनी समुद्री ताकत को और ज्यादा धार देने के लिए जल्द से जल्द ब्रह्मोस को अपनी सेना की बेड़े में शामिल करना चाहता है.
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मेजर जनरल एसके सिंह के मुताबिक, थाईलैंड अपनी एक अलग ही विदेश और रक्षा नीति पर चलता है. अपनी सेना के लिए आर्म्स और मिसाइल के लिए वह कभी भी एक देश के ऊपर भरोसा नहीं करता है. पहले वह आर्म्स की डील अमेरिका या चीन से करता था. लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव को देखते हुए, अब थाईलैंड ने भारत की डिफेंस सेक्टर की तरफ रुख किया है.
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बात करें, थाईलैंड की हमेशा से ये नीति रही है कि वह किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहता. अमेरिका और चीन के बीच चल रहे तनाव के बीच थाईलैंड भारत से हथियार खरीदकर अपनी रक्षा शक्ति को और ज्यादा मजबूत करना चाहता है.
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साउथ ईस्ट एशिया में भारतीय रक्षा मंत्रालय अपनी लगातार पकड़ बनाने में जुटा हुआ है. इसके परिणाम भी आने शुरू हो गए है. क्योंकि फिलीपींस ने भारत के साथ ब्रह्मोस खरीद की डील कर चुका है.
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थाईलैंड को क्या होगा फायदा?
- समुद्री सीमा में इसकी ताकत बढ़ेगी. थाईलैंड की नौसेना पहले से और ज्यादा मजबूत हो जाएगी.
- समुद्री व्यपार में इजाफा होने के साथ ही बेहतर सुरक्षा में कही कोई चूक नहीं रह पाएगी.
ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज रफ्तार वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है. ये ध्वनि की गति से करीब 3 गुना यानी Mach 2.8 से Mach 3 की स्पीड से वार करती है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता. यह मिसाइल अपने लक्ष्य पर बेहद सटीक निशाने पर फायर करती है. जिससे दुश्मन देश को भारी तादाद में नुकसान पहुंचता है. इसे पनडुब्बी, जहाजों, विमानों और जमीन पर मौजूद मोबाइल लॉन्चर्स से आसानी से दागा जा सकता है. इसका एंटी-शिप वेरिएंट दुश्मन के युद्धपोतों और समुद्री बेड़ों को नेस्तनाबूद करने के लिए बेहद मारक माना जाता है.
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