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आतंक, आतंकवाद, पाकिस्तान...तीनों का आपस में गहरा कनेक्शन, देखें पाक और टेररिज्म का ट्रैक रिकॉर्ड

पाकिस्तान और आतंकवाद का गहरा कनेक्शन रहा है। सालों पुराना ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। दुनियाभर में पिछले 20 सालों में जितने भी आतंकी हमले हुए हैं, उनका कनेक्शन पाकिस्तान से मिला है। पाकिस्तान आतंक, आतंकवाद और आतंकवादियों को फंडिंग, ट्रेनिंग और पनाह देता आया है।

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(दीपक दुबे, दिल्ली)

आतंक, आतंकवाद, पाकिस्तान…तीनों का आपस में गहरा कनेक्शन रहा है। पाकिस्तान को आतंकवाद और आतंकियों को पनाह देने के लिए हमेशा से ही कठघरे में खड़ा किया जाता रहा है। इतना ही नहीं दुनियाभर के कई देश पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करने की मांग कर चुके हैं, क्योंकि पाकिस्तान में पल रहे आतंक की फैक्ट्री में कई देश जले चुके हैं। पाकिस्तान में पसरे आतंकवादियों ने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के देशों में दहशत फैलाई है।

पाकिस्तान को अब एक बार फिर से भारत इंटरनेशनल लेवल पर आतंकवाद और आतंकवादियों को पालने पोसने और अपनी जमीन का इस्तेमाल करने लिए कटघरे में खड़ा कर चुका है। पाकिस्तान की सरकार द्वारा प्रायोजित आतंकवादी आतंकी हमलों का एक वैश्विक नेटवर्क चलाते हैं। आतंकवाद पर अमेरिकी विदेश विभाग की साल 2019 की रिपोर्ट में पाकिस्तान को एक ऐसे देश के रूप में पेश किया है, जो क्षेत्रीय रूप से केंद्रित आतंकवादी समूहों के लिए एक सुरक्षित आश्रय के रूप में काम करता है।

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मॉस्को आतंकी हमले का कनेक्शन पाकिस्तान से मिला

साल 2008 और साल 2011 में काबुल में भारतीय और अमेरिकी दूतावासों पर हमले हों, साल 2024 में रूस के मास्को में कॉन्सर्ट हॉल पर हमला हो, साल 2005 में लंदन में बम विस्फोट हो, सितंबर 2011 में अमेरिका में ट्विन टॉवर्स पर आतंकी हमला हो…उंगली हमेशा पाकिस्तान और पाकिस्तान में पल रही आतंकवाद की फैक्ट्री पर ही उठी है। पाकिस्तान भी गाहे बगाहे इस बात को कबूल कर ही लेता है कि आतंक की फैक्ट्री के लिए उसकी जमीन का इस्तेमाल हुआ है।

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साल 2024 में रूस के मॉस्को में कॉन्सर्ट हॉल हमला हुआ, जिसकी जांच के बाद अप्रैल 2025 में रूस की सरकार ने पुष्टि की कि मॉस्को आतंकी हमले की जांच में पाकिस्तान से हमले के तार जुड़े होने की बात सामने आई थी। रूसी अधिकारियों ने कॉन्सर्ट हॉल के मास्टरमाइंड की पहचान ताजिक के रूप में की है, जिसे पाकिस्तानी नेटवर्क से फंडिंग और समर्थन मिल रहा था।

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पाकिस्तान कर चुका हमले कराने की बात स्वीकार

साल 2018 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने स्वीकार किया था कि साल 2008 के मुंबई हमलों में पाकिस्तान ने ही भूमिका निभाई थी। उन्होंने माना था कि मुंबई में साल 2008 में आतंकी हमले को पाकिस्तान स्थित इस्लामी आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया था। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने भी यह स्वीकार किया था कि उनकी सेना कश्मीर में भारत से लड़ने के लिए आतंकवादी समूहों को प्रशिक्षण देती रहती है। तालिबान और हक्कानी नेटवर्क की मदद से पाकिस्तान की ISI, अफगानिस्तान, तालिबान और हक्कानी नेटवर्क का समर्थन करने, उन्हें फंडिंग करने, आतंकियों को ट्रेनिंग देने और सुरक्षित पनाह देने में अहम भूमिका निभा रही है।

अफगानिस्तान के नागरिकों को मौत के घाट उतारने, सरकारी संस्थानों पर आतंकी हमले करने में इनकी भूमिका रही है। इनमें साल 2008 में काबुल में भारतीय दूतावास पर बमबारी और 2011 में काबुल में अमेरिकी दूतावास पर हमला शामिल है। ब्रिटिश नागरिक और कार्लोटा गैल ने अपनी किताब में लिखा है कि भारतीय और अमेरिकी दूतावास पर बमबारी ISI एजेंटों द्वारा किया गया कोई ऑपरेशन नहीं था, बल्कि इसे पाकिस्तानी खुफिया विभाग के सबसे सीनियर अधिकारियों द्वारा मंजूरी दी गई थी और उनकी निगरानी में ही हमला किया गया था।

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ईरान और जैश उल-अदल हमले

पाकिस्तान स्थित सुन्नी चरमपंथी समूह जैश उल-अदल ने सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में ईरानी सुरक्षा बलों पर बार-बार हमला किया है। ईरान ने इसके जवाब में 16 जनवरी 2024 को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के अंदर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसमें जैश उल-अदल के ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने हमेशा पाकिस्तान पर सीमा पार हमले करने वाले सुन्नी आतंकवादियों को पनाह देने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने का आरोप लगाया है।

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7 जुलाई 2005 को लंदन में हुए बम विस्फोट, जिन्हें 4 ब्रिटिश इस्लामिस्ट आतंकवादियों ने अंजाम दिया था, उन्हें पाकिस्तान के चरमपंथी विचारधारा से जुड़ा हुआ पाया गया था और उनकी ट्रेनिंग भी आतंकियों की फैक्ट्री पाकिस्तान में हुई थी। हमलावरों में से 3 हमलावर मोहम्मद सिद्दीक खान, शहजाद तनवीर और जर्मेन लिंडसे ने साल 2003 और 2005 के बीच का समय पाकिस्तान में ही बिताया था। अमेरिका मे हुए 9/11 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने ही पनाह दी थी, जिसे अमेरिका के कमांडोज ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद में उसके घर के अंदर घुसकर ढेर किया था।

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जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) संचालन

पाकिस्तान की ISI पर जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) को वित्तपोषित करने और प्रशिक्षण देने का आरोप है, जो एक प्रतिबंधित इस्लामी समूह है, जो साल 2016 में ढाका के गुलशन कैफे हमले में बंधकों की हत्या के लिए जिम्मेदार है। 2015 में बांग्लादेशी अधिकारियों ने पाकिस्तानी राजनयिकों को JMB के गुर्गों को पैसे ट्रांसफर करते रंगे हाथों पकड़ने के बाद निकाल दिया था। 2020 की एक खुफिया रिपोर्ट में JMB के जरिए बांग्लादेश के कॉक्स बाजार शिविरों में 40 रोहिंग्या शरणार्थियों को ट्रेनिंग कराने में भी पाकिस्तान की संलिप्तता का खुलासा हुआ था, जिसका उद्देश्य उन्हें भारत में घुसपैठ कराना था।

खाड़ी स्थित गैर सरकारी संगठनों और पाकिस्तानी बिचौलियों के जरिए वित्तपोषित JMB का नेटवर्क बांग्लादेश और भारत तक फैला हुआ है, जिसमें पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में स्लीपर सेल एक्टिव हैं। पाकिस्तान ने पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, वजीरिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर PoK में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों का बड़ा नेटवर्क तैयार कर रखा है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), हिजबुल मुजाहिदीन (HM) और ISIS-खोरासन जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों द्वारा संचालित यह शिविर कट्टरपंथ, हथियार प्रशिक्षण और आत्मघाती मिशन की तैयारी के लिए आतंक के एपिसेंटर के रूप में काम करते हैं। इन शिविरों में पूर्व पाकिस्तानी सेना के जवान और अफसर ट्रेनिंग देने में मदद करते हैं।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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