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एयरफोर्स को जल्द मिलेगा तेजस Mk-1A, टेस्टिंग के बाद होगा शामिल

भारतीय वायुसेना को अप्रैल 2026 में तेजस Mk-1A की पहली खेप मिलने की संभावना है, जिससे वायु शक्ति में बड़ा इजाफा होगा.
HAL और एयरफोर्स की बैठक के बाद डिलीवरी पर अंतिम फैसला होगा, इंजन सप्लाई में सुधार से प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ी है.

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इंडियन एयरफोर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी एचएएल यानी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड लेकर आई है, क्योंकि मेक इन इंडिया में भारतीय वायुसेना एक और छलांग लगाने वाली है. आपको बता दें कि साल 2021 से ही नई पीढ़ी के तेजस का इंतजार भारतीय वायुसेना कर रही थी, और अब यह इंतजार इसी अप्रैल महीने में खत्म होने वाला है, क्योंकि तेजस मार्क 1A की डिलीवरी अप्रैल के तीसरे हफ्ते में हो जाएगी. इंडियन एयरफोर्स के सूत्रों ने न्यूज 24 को जानकारी दी है कि बहुत जल्द एचएएल चीफ और वायुसेना चीफ के बीच एक अहम बैठक होने वाली है. और इसी बैठक में ही नए तेजस की डिलीवरी का ऐलान कर दिया जाएगा. लेकिन डिलीवरी से पहले एचएएल को तेजस की मारक क्षमता के साथ ही इसकी नई तकनीक की पूरी जानकारी अपग्रेडेशन के साथ साझा करनी होगी कि नया तेजस भारतीय वायुसेना के लिए कितना लाभ पहुंचा सकता है. इसके अलावा तेजस को एयर स्टाफ क्वालिटी रिक्वायरमेंट के कड़े मापदंड से गुजरना पड़ेगा और यहां से क्लीयरेंस मिलने के बाद ही तेजस को वायुसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा.

आखिर किस तरह से की जाएगी तेजस की जांच

  • एचएएल की फैक्ट्री में, जहां तेजस का निर्माण किया जा रहा है, वहां सबसे पहले वायुसेना की टेक्निकल टीम के सीनियर अधिकारी पहुंचकर इसकी क्वालिटी की जांच करेंगे.
  • फाइटर पायलट इसकी क्षमता को परखेंगे.
  • फिर एक फाइनल रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
  • कोई कमी पाए जाने पर एचएएल को दोबारा इसे ठीक करने के लिए कहा जाएगा.
  • जब तक फाइटर पायलट इसकी गुणवत्ता को परख नहीं लेंगे, इसे वायुसेना में शामिल नहीं किया जाएगा.

साल 2024 के एयरो इंडिया में एयर चीफ ने तेजस की डिलीवरी को लेकर एचएएल चीफ को खूब खरी-खोटी सुनाई थी, जिसके बाद एचएएल की तरफ से जल्द से जल्द डिलीवरी करने का वादा किया गया था. वायुसेना के एक बड़े अधिकारी ने न्यूज 24 से बातचीत में कहा कि इसकी डिलीवरी में देरी होने की सबसे बड़ी वजह तेजस के इंजन की समय पर सप्लाई न होना है. आपको बता दें कि तेजस मार्क-1A के लिए इंजन की डील जनरल इलेक्ट्रिक के साथ 2021 में हुई थी. इस समझौते के तहत भारत को 99 F404 इंजन मिलने हैं. अब धीरे-धीरे इंजन मिलने शुरू हुए हैं, जिससे प्रोजेक्ट में तेजी आने की उम्मीद है.

अब सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि वायुसेना के लिए तेजस बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है. तो आपको बता दें कि इंडियन एयरफोर्स को भविष्य के युद्ध को देखते हुए 42 फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत है, लेकिन अभी उसके पास सिर्फ 29 स्क्वाड्रन ही हैं. और इसी कमी को देखते हुए तेजस इंडियन एयरफोर्स के लिए बेहद जरूरी हो गया है. वायुसेना पहले ही 40 में से 38 तेजस (मार्क-1) शामिल कर चुकी है. HAL को 83 तेजस मार्क-1A देने का ऑर्डर मिला है. 97 और तेजस मार्क-1A की डील भी हो चुकी है. इन विमानों से आने वाले समय में कुल 9 नए स्क्वाड्रन तैयार होंगे. यही वजह है कि एचएएल और इंडियन एयरफोर्स की मीटिंग को लेकर पशोपेश की नौबत आ गई है कि आखिर इस बार भी डिलीवरी हो पाएगी या नहीं.

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