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सोशल मीडिया पर ‘उम्र की लक्ष्मण रेखा’ खींचने की तैयारी! TDP सांसद ने अश्विनी वैष्णव को लिखा पत्र, कड़े कानून की मांग

पत्र में सांसद देवरायलु ने कहा कि भारत में 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के करीब 90 फीसदी बच्चों के पास स्मार्टफोन है. 75 फीसदी से ज्यादा बच्चे सक्रिय रूप से सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. ( प्रशांत देव की रिपोर्ट )

सोशल मीडिया पर बच्चों की बढ़ती डिजिटल लत और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए नरसारावपेट से सांसद और लोकसभा में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के फ्लोर लीडर लवु कृष्णा देवरायलु ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर आयु-आधारित सोशल मीडिया नियमन पर नीतिगत विचार-विमर्श की मांग की है.

पत्र में सांसद देवरायलु ने कहा कि भारत में 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के करीब 90 फीसदी बच्चों के पास स्मार्टफोन है. 75 फीसदी से ज्यादा बच्चे सक्रिय रूप से सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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उन्होंने चिंता जताई कि 60 फीसदी से ज्यादा नाबालिग ऑनलाइन बुलिंग का शिकार हो चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में बच्चे आयु-अनुपयुक्त और हानिकारक कंटेंट के संपर्क में आ रहे हैं. सांसद ने सोशल मीडिया के ज्यादा यूज को किशोरों में बढ़ती चिंता, अवसाद और आत्म-हानि जैसी प्रवृत्तियों से जोड़ते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म्स बच्चों के डेटा का पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना संग्रह और व्यावसायीकरण कर रहे हैं.

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पत्र में गाजियाबाद और लखनऊ की हालिया घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल लत, साइबर बुलिंग और ऑनलाइन मानसिक दबाव के कारण नाबालिगों की मौत ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है. इसके साथ ही आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 का हवाला देते हुए उन्होंने युवाओं में बढ़ती डिजिटल एडिक्शन और उससे जुड़े मानसिक स्वास्थ्य जोखिमों पर भी चिंता जताईॉ.

लवु कृष्णा देवरायलु ने बताया कि कई देश इस दिशा में कड़े कदम उठा रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लागू किया है, जबकि डेनमार्क, मलेशिया, नॉर्वे, ब्रिटेन और न्यूज़ीलैंड जैसे देश विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इससे यह साफ होता है कि केवल पैरेंटल कंट्रोल काफी नहीं है और जिम्मेदारी सीधे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की होनी चाहिए.

सांसद ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने सोशल मीडिया (आयु प्रतिबंध और ऑनलाइन सुरक्षा) पर एक निजी सदस्य विधेयक संसद में पेश किया है. इस विधेयक में सोशल मीडिया उपयोग के लिए न्यूनतम आयु सीमा तय करने, अनिवार्य आयु-सत्यापन तंत्र लागू करने, सत्यापन के दौरान एकत्र किए गए बच्चों के डेटा को स्थायी रूप से हटाने और नियमों का उल्लंघन करने पर कड़े दंड का प्रावधान शामिल है.

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश में एनडीए-नेतृत्व वाली सरकार भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है.

सांसद देवरायलु ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से आग्रह किया कि सोशल मीडिया के आयु-आधारित नियमन पर अध्ययन के लिए एक समर्पित समिति या विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाए, ताकि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार की जा सके.


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