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तमिलनाडु चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव? अमित शाह से मिले पलानीस्वामी, इन मुद्दों पर हुई बात

इस साल देश में 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसमें एक राज्य तमिलनाडु भी शामिल है। तमिलनाडु में फतह के लिए एनडीए ने तैयारियां शुरू कर दीं हैं। देर रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पलानीस्वामी के बीच लंबी बैठक हुई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

Palaniswami meets Amit Shah

तमिलनाडु में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को और मजबूत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व AIADMK से निष्कासित नेताओं ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS), टीटीवी दिनाकरन और प्रेमलता विजयकांत के नेतृत्व वाली DMDK को दोबारा NDA में लाने के पक्ष में है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पलानीस्वामी के बीच बुधवार देर रात लंबी बैठक हुई, जिसे गठबंधन विस्तार की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति, DMK विरोधी वोटों के एकीकरण और NDA को चुनाव से पहले एकजुट रूप में पेश करने को लेकर केंद्रित रही। हालांकि AIADMK महासचिव ई. पलानीस्वामी OPS और दिनाकरन की वापसी को लेकर अब भी असहज हैं। सूत्रों का कहना है कि पलानीस्वामी किसी भी ऐसे नेता को दोबारा साथ लेने के पक्ष में नहीं हैं, जो भविष्य में पार्टी के भीतर उनकी नेतृत्व क्षमता को चुनौती दे सके या संगठन पर उनकी पकड़ को कमजोर कर दे।

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इसके बावजूद भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व DMK के खिलाफ व्यापक मोर्चाबंदी पर जोर दे रहा है। पार्टी का आकलन है कि OPS और दिनाकरन दोनों का प्रभावशाली थेवर समुदाय पर खास असर है, जो एक महत्वपूर्ण OBC वर्ग है। यही वजह है कि भाजपा एआइएडीएमके पर दोनों नेताओं के साथ फिर से गठबंधन के लिए दबाव बना रही है। इस कोशिश में तेजी इसलिए भी आई है क्योंकि OPS और दिनाकरन, अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महीने के अंत में प्रस्तावित तमिलनाडु यात्रा से पहले भाजपा एक “काफी मजबूत और सशक्त NDA” का खाका तैयार करना चाहती है। पीएम मोदी राज्य में कई रैलियों को संबोधित कर चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। भाजपा लंबे समय से तमिलनाडु में अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर भाजपा अपने कोटे की कुछ सीटें छोटी पार्टियों को देने पर भी विचार कर सकती है, ताकि उन्हें NDA में समायोजित किया जा सके।

इन तमाम हलचलों के बीच DMK-कांग्रेस गठबंधन में भी अंदरूनी खटास के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस के एक वर्ग की ओर से अधिक सीटों और सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी की मांग या TVK के साथ विकल्प तलाशने की चर्चाएं सामने आई हैं। भाजपा NDA को एक स्थिर और मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है।

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