केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर तमिलनाडु की राजनीति गरमा गई है. संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व और सीटें कम न हों, इसे लेकर शनिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने सांसदों और नेताओं के साथ सर्वदलीय बैठक की. कलाईवानार अरंगम में हुई इस बैठक में शामिल तमाम नेताओं ने एक सुर में परिसीमन का विरोध करने और एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया. साथ ही सर्वसम्मति से मांग की गई कि लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 और राज्यों के वर्तमान प्रतिनिधित्व को यथावत रखा जाए। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, इस सर्वदलीय बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के लगभग 21 सांसद शामिल हुए.

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बैठक में तमिलनाडु के कुल 57 सांसदों (39 लोकसभा और 18 राज्यसभा) में से मुख्य रूप से कांग्रेस, वीसीके (VCK), सीपीआई (CPI), सीपीआई-एम (CPI-M), एमडीएमके (MDMK) और आईयूएमएल (IUML) के नेताओं ने हिस्सा लिया. हालांकि, राज्य की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) ने इस बैठक का बहिष्कार किया और शामिल नहीं हुईं.

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"आबादी के आधार पर परिसीमन बर्दाश्त नहीं"

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए तमिलनाडु विधानसभा में एक सरकारी प्रस्ताव पारित किया जाएगा. इसके साथ ही परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक का संसद में कड़ा विरोध करने और उसके खिलाफ मतदान करने का भी संकल्प लिया गया. बैठक में मौजूद सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का नया बंटवारा तमिलनाडु के राजनीतिक अधिकारों को नुकसान पहुंचाएगा. नेताओं का मानना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतरीन काम किया है, उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए.

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बैठक के बाद कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या 815 या 850 करने और उसके अनुपात में तमिलनाडु को सीटें देने से राज्य को कोई वास्तविक लाभ नहीं होगा. उन्होंने कहा कि इससे सांसदों को संसद में बोलने का अवसर और कम मिलेगा. सीपीएम सांसद सु. वेंकटेशन और एमडीएमके के दुरई वाइको ने भी कहा कि राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित न हो, इसके लिए सीटों की संख्या को अनिश्चितकाल के लिए फ्रीज किया जाना चाहिए.

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