Surgical Strike से हिल गया था पाकिस्तान, जानें भारत ने कैसे लिया 18 जवानों के बलिदान का बदला

Indian Army

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Surgical Strike 7 Years: सर्जिकल स्ट्राइक को आज 7 साल हो चुके हैं। भारतीय सेना के जवानों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकी ठिकानों और आतंकियों को ध्वस्त करके उरी में शहीद हुए 18 जवानों के बलिदान बदला लिया था। दुनियाभर में उरी में आतंकी हमले की निंदा हुई और भारतीयों के दिलों में बदले की ऐसी आग धधकी कि सरकार ने भी इस आग को ठंडा करने के आदेश भारतीय सेना को दे दिए और इसके बाद भारतीयों ने पाकिस्तान के साथ जो किया, उसे पाकिस्तानी कभी भूल नहीं जाएंगे, न भूलने दिया जाएगा। आइए जानते हैं सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में वह सब कुछ, जो हर भारतीय को पता होना चाहिए…

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सर्जिकल स्ट्राइक क्या होती है?

दुश्मन के घर में घुसकर उसके ठिकाने ध्वस्त करना, दुश्मनों का खात्मा करना सर्जिकल स्ट्राइक कहलाता है। इसे करने से पहले पूरी तैयारी के साथ योजना बनाई जाती है। दुश्मन के ठिकानों, सटीक लोकेशन और दुश्मनों की संख्या के बारे में पता लगाया जाता है। इसके बाद कमांडो या सेना के जवान चुपके से रात के अंधेरे में दुश्मन के घुसकर हमला करते हैं, जो इतना घातक होता है कि दुश्मन को संभलने तक का मौका नहीं मिलता। जमीनी, हवाई या पानी तीनों रास्तों से सर्जिकल स्ट्राइक की जा सकती है और इसका टारगेट इतना सटीक होता है कि आम लोगों को पता भी नहीं चलता, नुकसान पहुंचना तो दूर की बात है।

भारत कितनी सर्जिकल स्ट्राइक कर चुका?

18 सितंबर 2016 को उरी में सेना के कैंप में घुसकर आतंकियों ने जानलेवा हमला किया था, जिसमें 18 जवान शहीद हुए थे। इसके 10 दिन बाद 28 सितंबर को भारत ने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इससे पहले 1998 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान में जाकर दुश्मनों का खात्मा किया था। 1999 में कारगिल युद्ध के बीच भारतीय जवानों ने LOC पार करके पाकिस्तानी चौकी उड़ाई थी। 2015 में भारतीय जवानों ने म्यांमार में घुसकर उग्रवादी संगठन को ध्वस्त कर दिया था। इनके अलावा भी कई सर्जिकल स्ट्राइक भारतीय सेना के जवान कर चुके हैं, लेकिन उनके बारे में आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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क्यों पड़ी 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत?

28 सितंबर 2016 को भारत को पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक करने की जरूरत पड़ी, क्योंकि पाकिस्तान से आए आतंकियों ने भारतीय सेना के उरी कैंप में घुसकर 18 जवानों को मार दिया था। सुबह करीब 5 बजे 4 आतंकियों ने कैंप में सो रहे जवानों पर हैंड ग्रेनेड से हमला किया। इससे पहले कि जवान जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार होते, उनहें गोलियों से छलनी कर दिया गया। उरी जम्मू कश्मीर के बारामूला जिले LOC से सटा इलाका है, जिसके चारों पश्चिम में झेलम नदी, उत्तर में पीर पंजाल की पहाड़ियां हैं। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

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सर्जिकल स्ट्राइक 28 सितंबर को ही क्यों हुई?

पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए उस समय के रक्षा मंत्री रहे दिवंगत मनोहर परिकर ने 2 बातें कही थी कि एक आम लोगों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। दूसरा अपना कोई जवान नहीं खोना। इसके बाद तारीख तय हुई तो 28 सितंबर तय की गई, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में 22 सितंबर को पाक PM नवाज शरीफ ने भाषण दिया था। 25 सितंबर को भारत की उस समय विदेश मंत्री रही दिवंगत सुषमा स्वराज ने स्पीच देनी थी। भारत सरकार के साफ निर्देश थे कि इन दिनों में कुछ नहीं करना है, इसलिए 3 दिन शांत रहने को कहा गया, ताकि दुश्मन को लगे कि भारत चुप रह गया। इसलिए 28 तारीख चुनी गई।

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POK में घुसकर ऐसे ध्वस्त किए गए आतंकी

सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए 175 कमांडो तैयार किए गए थे। 25 और 150 के 2 ग्रुप बनाए गए। 25 कमांडो POK में घुसे थे और 150 बैकअप बनकर पीछे थे। 25 कमांडो की टीम कुपवाड़ा के नौगाम से POK में घुसी। LOC के पास 3 आतंकी कैंप टारगे थे, जहां पहुंचने के 2 रास्ते थे। भारतीय कमांडो की टीम ने लंबा रास्ता लिया, क्योंकि गांव के रास्ते से निकलते तो आतंकी अलर्ट हो जाते। सबसे ज्यादा खतरा कुत्तों के भौंकने से था। इसके बाद भारतीय कमांडों ने करीब 40 आतंकियों को ढेर किया। दिन निकलने से पहले कमांडो अपने देश में थे और एक भी जवान को एक खरोंच तक नहीं आई थी।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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