पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान हुई गंभीर सुरक्षा चूक को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अगर राज्य की कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली मशीनरी फेल होती है, तो सुप्रीम कोर्ट खुद हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगी. ये टिप्पणी उस घटना के बाद आई है, जिसमें मालदा जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत काम कर रहे अधिकारियों को घंटों तक घेरकर रखा गया था. इस घटना को अदालत ने बेहद गंभीर मानते हुए इसे कानून-व्यवस्था की बर्बादी बताया.

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बंगाल सरकार पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन से सवाल किया कि आखिर अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई. अदालत ने कहा कि चुनाव जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हैं. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये भी साफ किया कि अगर राज्य सरकार हालात संभालने में असफल रहती है, तो केंद्र या न्यायपालिका को आगे आना पड़ेगा. अदालत ने पहले ही ऐसे मामलों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती जारी रखने का निर्देश दिया है ताकि अधिकारियों और चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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बचाव के लिए रोती हुई महिला ज्यूडिशियल ऑफिसर का वीडियो कोर्ट ने देखा. कोर्ट ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए और निष्पक्ष जांच पर सवाल उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने मालदा हिंसा की जांच पूरी तरह से तत्काल NIA को सौंपी. अब राज्य पुलिस की कोई दखल नहीं होगी

साथ ही कोर्ट ने कोलकाता HC के चीफ जस्टिस के बुलाने पर न जाने पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने मुख्य सचिव से कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से माफी मांगने को कहा. सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी.

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट ने राज्य के शीर्ष नौकरशाहों को फटकार लगाते हुए जवाबदेही तय करने को कहा है. साथ ही ये भी निर्देश दिया गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं. बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं के नामों की जांच और संशोधन किया जा रहा है. इस दौरान कई जगहों पर विवाद और विरोध भी देखने को मिला है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट लगातार इस पूरे मामले की निगरानी कर रहा है ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और सुरक्षित बनी रहे.

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