महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर है. सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (UBT) गुट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह याचिका उद्धव गुट के 6 सांसदों के पार्टी बदलकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को दी गई मान्यता के खिलाफ दाखिल की गई थी. उद्धव ठाकरे गुट ने अपनी याचिका में लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले को सीधे चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने 6 बागी सांसदों को शिंदे गुट में शामिल होने और उनके विलय को आधिकारिक मंजूरी दी थी. याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह फैसला नियमों के खिलाफ है और इस पर कानूनी पुनर्विचार जरूरी है.

Supreme Court issues notice on a plea by Shiv Sena Uddhav Balasaheb Thackeray (UBT) challenging Lok Sabha Speaker Om Birla's decision to recognise the merger of six rebel MPs with the Maharashtra Deputy Chief Minister Eknath Shinde-led Shiv Sena.

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संसद में घटी उद्धव गुट की ताकत

संसद सत्र की शुरुआत से ठीक पहले लोकसभा अध्यक्ष द्वारा 6 सांसदों के विलय को मान्यता दिए जाने के बाद लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों की संख्या घटकर महज 3 रह गई थी. इसके खिलाफ शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद अरविंद सावंत ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. याचिका में दलील दी गई कि ये सांसद उद्धव ठाकरे की पार्टी के निशान पर चुनाव जीतकर आए थे और उन्होंने अपनी मूल पार्टी का किसी अन्य दल में विलय नहीं किया है. ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष के पास सीधे तौर पर विलय को मंजूरी देने का संवैधानिक अधिकार नहीं है.

अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने याचिकाकर्ता की तरफ से कहा कि यह मामला सीधे तौर पर संसदीय व्यवस्था और संवैधानिक नैतिकता से जुड़ा हुआ है. फिलहाल दो हफ्तों के लिए शिंदे गुट को राहत मिली हुई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस नोटिस के बाद अब लोकसभा अध्यक्ष और बागी सांसदों को अदालत में अपना रुख स्पष्ट करना होगा.

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