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ना 100 ना 101 ना 108... अब एक ही नंबर पर मिलेंगी सभी इमरजेंसी सुविधाएं, पढ़ें SC का बड़ा फैसला

Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की राज्य सरकारों को एक आदेश दिया है। मामला मदद के लिए घुमाए जाने वाले इमजरेंसी हेल्पलाइन नंबरों का है, जिन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला किया है। जिसकी घोषणा करके आदेश का पालन करने की समयसीमा भी तय कर दी गई है।

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देशभर में लागू इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर अब एक होने जा रहे हैं।

इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा आदेश दिया है। यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए है, जिसका पालन 3 महीने के अंदर करने के निर्देश हैं। मामला पुलिस, एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड बुलाने के लिए घुमाए जाने वाले इमरजेंसी कॉल नंबर 100, 101, 108 आदि से जुड़ा है, जिन्हें बंद करके एक ही नंबर हेल्पलाइन 112 से जोड़ने का आदेश दिया गया है। ऐसा होने से लोगों को कई सारे हेल्पलाइन नंबर याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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आदेश देते समय सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने आदेश जारी किया। साथ ही इसे फॉलो करने के लिए निर्देश भी दिए। बेंच ने अपने आदेश में कहा कि देशवासियों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार मिला है, लेकि सही समय पर इलाज या उपचार न मिलने पर उनसे यह अधिकार छिन जाता है। इसलिए लोगों को सही समय पर ट्रॉमा केयर (आपातकालीन इलाज) मिलनी जरूरी है। इसके लिए हेल्प सिस्टम में बदलाव लाने की जरूरत महसूस हुई।

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डायल 112 से जुड़ेंगे ये इमरजेंसी नंबर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रॉमा केयर का सिस्टम एक जैसा बनाने, लोगों को हेल्पलाइन के लिए जागरुक करने और फर्स्ट-एड यानी प्राथमिक उपचार स्किल्स को स्टैंडर्डाइज करने की सख्त जरूरत है। इसलिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश है कि वे 3 महीने के अंदर सभी इमरजेंसी नंबरों को 112 से टेक्निकल और ऑपरेशनल लेवल पर जोड़ें। इस नंबर से इमरजेंसी नंबर 100, 101, 108, 102, 1033 और 1091 को जोड़कर एक हेल्पलाइन नंबर से ही सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

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राज्य सरकारों के साथ केंद्र को निर्देश

राज्य सरकारों को हेल्पलाइन 112 का प्रचार-प्रसार करना होगा। 3 महीने के अंदर कम्प्लायंस रिपोर्ट सौंपें। राज्य सरकारों को ‘गुड समैरिटन कानून’ (सड़क हादसों में मदद करने वालों की सुरक्षा के नियम) के तहत शिकायत निवारण टीम बनानी होगी।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भी अहम निर्देश देती है कि वह ट्रॉमा (हादसों या चोट) से जुड़े मामलों के लिए 3 महीने के अंदर ‘मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल’ जारी करे।

केंद्र सरकार प्रोटोकॉल जारी करेगी, जिसके तहत 3 महीने के अंदर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसे लागू करके ऑपरेशनलाइज करना होगा।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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