CJP 10 October Protest: सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत को लेकर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने सरकार के वकील से कहा, आप रेगुलेट करिये लेकिन ये सही नहीं कि मेट्रो बंद कर दिया, सभी के पास कार नहीं होते. मेट्रो ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी घटाने की बात है, आपने मेट्रो स्टेशन ही बंद कर दिए.सरकारी वकील से CJI ने कहा इसके लिए कुछ करिये ताकि पब्लिक फैसिलिटीज के इस्तेमाल में कोई दिक्कत न हो.
मेट्रो-ट्रेनों के चलने पर ‘पूरी तरह से रोक’ नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि मेट्रो-ट्रेनों के चलने पर ‘पूरी तरह से रोक’ नहीं लगाई जाएगी. न्यायालट ने अधिकारियों से कहा है कि 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शनों से पहले मेट्रो और दूसरी रेलवे सेवाओं को सही तरीके से रेगुलेट करके चलने दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने फैसले की व्यापक जानकारी दें जिससे यात्रियों को कम से कम परेशानी हो, और साथ ही संतुलित संचालन का भी ध्यान रखा जाए.
ट्रेनें कैंसिल करने पर क्या कहा?
वकील कपिल सिब्बल ने मेट्रो के अलावा रेलवे की ट्रेनें जो कैंसिल कर दी गयी हैं उसके बारे में भी अदालत से राहत देने की अपील की. इसको लेकर सीजेआई ने कहा, ‘मक्खी मारने के लिए आप हथौड़ा नहीं ला सकते. बुज़ुर्ग बीमार सब लोग आते जाते हैं इसका ख्याल रखना है – सड़कों पर बैरिकेड ज़रुरत के मुताबिक लगाना है और कोई रोड बंद करनी है तो उसकी जानकारी अखबारों में देनी है.
‘मेरे देश में क्या हो रहा है?’
कोर्ट ने ये बातें सीपीएम के जनरल सेक्रेटरी एमए बेबी की उस अर्जी पर सुनवाई के दौरान कहीं, जिसमें मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेनें रद्द करने के खिलाफ अपील की गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर वकील और सांसद कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा, ‘सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, मेट्रो स्टेशन बंद हैं. आप कहीं आ-जा नहीं सकते. मेरे देश में क्या हो रहा है? यह एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन है.’
कोर्ट को पैसेंजर्स की चिंता
CJI सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल से कहा, ‘हमारी सबसे बड़ी चिंता इन मेट्रो स्टेशनों के एंट्री गेट पूरी तरह बंद करने को लेकर है. हमारी चिंता किसी खास प्रदर्शनकारी या शख्स को लेकर नहीं है; बल्कि उन सैकड़ों-हजारों यात्रियों को लेकर है जो अपनी रोजी-रोटी के लिए गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली से दिल्ली आते-जाते हैं.’
‘लोगों कू सुविधा का ध्यान रखें’
सुरक्षा उपाय लागू करने के अधिकारियों के अधिकार का समर्थन करते हुए, कोर्ट ने लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखने को कहा. देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा, ‘कानून लागू करने वाले अधिकारियों को निश्चित रूप से नियम-कायदे लागू करने का अधिकार है; इसमें कोई शक नहीं है. अगर आप बेकाबू आवाजाही को रोकना चाहते हैं, तो आप ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप सब कुछ ठप कर दें और लोगों को बिना किसी ट्रांसपोर्ट के छोड़ दें.’
‘सरकार से सलाह-मशविरा करेंगे’
कोर्ट की टिप्पणियों का जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वो सरकार से सलाह-मशविरा करेंगे और भरोसा दिलाया कि हालात के हिसाब से उचित कदम उठाए जाएंगे. मेहता ने जुलाई में हुए CJP विरोध प्रदर्शन और उस दौरान हुई हिंसा का भी जिक्र किया. मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया, ‘रेलवे और मेट्रो स्टेशनों के मामले में, मैं सरकार के पास जाऊंगा और हालात के हिसाब से उचित कदम उठाए जाएंगे.’ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सड़कें बंद करने के फैसले पर भी फिर से विचार करने की जरूरत है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस बात का आकलन किया जाए कि किन इलाकों में पाबंदियों की जरूरत है और किनमें नहीं.