देश में लोगों के व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. अदालत ने उन आरोपों पर केंद्र सरकार को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जिनमें निजी कंपनियों द्वारा कर्मचारी और करदाताओं से जुड़े संवेदनशील डेटा के कथित अनधिकृत इस्तेमाल और व्यावसायिक उपयोग की बात कही गई है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और संबंधित सरकारी विभागों से कहा कि इस मामले में की गई शिकायतों और प्रस्तुतियों पर व्यापक स्तर पर विचार किया जाए और डेटा के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. अदालत ने उम्मीद जताई कि सरकार इस पर करीब चार महीने के अंदर फैसला लेगी.
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क्या है पूरा मामला?
बता दें कि ये मामला कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े UAN और रोजगार संबंधी रिकॉर्ड के साथ-साथ पैन और आयकर विभाग से संबंधित वित्तीय सूचनाओं के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है. याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ निजी वेरिफिकेशन संस्थाएं ऐसे डिजिटल सिस्टम और सेवाओं का इस्तेमाल कर रही हैं, जिनके जरिए किसी व्यक्ति की नौकरी और वित्तीय पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी तक पहुंच संभव हो सकती है.
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी दावा किया गया कि बाजार में 'EPFO Passbook API', 'Form 26AS API' और 'Income Tax Return API' जैसी सेवाओं का प्रचार किया जा रहा है. इससे यह सवाल उठता है कि सरकारी रिकॉर्ड में सुरक्षित संवेदनशील जानकारी निजी संस्थाओं तक किस कानूनी और तकनीकी व्यवस्था के तहत पहुंच रही है. याचिका में यह चिंता भी जताई गई कि कुछ मामलों में PAN और UAN जैसी जानकारी उपलब्ध कराने भर से व्यक्ति की रोजगार संबंधी जानकारी हासिल किए जाने की संभावना हो सकती है.
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याचिका में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, EPFO, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और CERT-In में भी शिकायत की गई थीं. इसी तरह वित्त मंत्रालय, आयकर विभाग और CBDT से भी कर संबंधी डेटा के संभावित इस्तेमाल की जांच की मांग की गई थी.
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प्राइवेट कंपनियों द्वारा डेटा के गलत इस्तेमाल को रोकें
सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट कंपनियों द्वारा सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद व्यक्तिगत डेटा के संभावित गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की बेंच ने कहा कि यह मामला मुख्य रूप से पॉलिसी से जुड़ा है. हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत सरकार को दी गई व्यक्तिगत जानकारी तक प्राइवेट कंपनियों की पहुंच और उसके कमर्शियल इस्तेमाल का मुद्दा गंभीर है.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपनी जांच का हवाला देते हुए बताया कि सिर्फ PAN और UAN जैसी जानकारी एक प्राइवेट वेरिफिकेशन सिस्टम में उपलब्ध कराने पर संबंधित व्यक्ति की पूरी रोजगार हिस्ट्री सामने आ गई. याचिकाकर्ता के मुताबिक, इस प्रक्रिया में न तो OTP के जरिए ऑथेंटिकेशन हुआ और न ही लोगों से स्पष्ट सहमति ली गई. पहचान सत्यापन के लिए कोई स्पष्ट ऑथराइजेशन आधारित प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई.
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डेटा सुरक्षा पर गंभीर सवाल
याचिकाकर्ता ने सरकारी एजेंसियों पर सीधे डेटा लीक का आरोप लगाए बिना, अलग-अलग कानूनों के तहत सरकार के पास जमा व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उनका कहना था कि प्राइवेट कंपनियां इस डेटा तक अपनी जरूरत के मुताबिक पहुंच बना रही हैं.
याचिकाकर्ता ने कहा कि EPFO और इनकम टैक्स डेटा को नियंत्रित करने वाले कानूनी प्रावधानों के बावजूद एक चिंताजनक पैटर्न सामने आ रहा है. इसके तहत कुछ प्राइवेट रोजगार वेरिफिकेशन सिस्टम रोजगार सत्यापन, मूनलाइटिंग का पता लगाने, दोहरी नौकरी की जांच, लेबर मार्केट प्रोफाइलिंग और रोजगार से जुड़े फैसलों के लिए कानूनी रोजगार और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े डेटा पर निर्भर कर रहे हैं.
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सरकार पॉलिसी के जरिए करे समाधान
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि उठाया गया मुद्दा गंभीर है, लेकिन इसे पॉलिसी स्तर पर सुलझाने की जरूरत है. सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार को दो विस्तृत ज्ञापन सौंपे हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह प्राइवेट कंपनियों द्वारा व्यक्तिगत डेटा के संभावित गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए और इस संबंध में उचित पॉलिसी तैयार करे.