Supreme Court New Judges: देश की सर्वोच्च अदालत को 5 नए जज मिल गए हैं. केंद्र सरकार ने सोमवार (1 जून 2026) को इन जजों की नियुक्ति से जुड़ी अधिसूचना जारी कर दी है. राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी. हाल ही में केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या (सीजेआई सहित) बढ़ाकर 38 की थी. इस लिहाज से अब शीर्ष अदालत में केवल एक पद खाली रह गया है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बीते 27 मई को इन नामों की सिफारिश की थी, जिसे सरकार ने महज चार दिनों के भीतर मंजूरी दे दी.
कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के 5 नए जज?
- जस्टिस शील नागू (Justice Sheel Nagu)
सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट होने से पहले वे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे रहे थे. उनका मूल हाई कोर्ट मध्य प्रदेश है, जहां वे 2011 में जज बने थे. उन्होंने कई बड़े संवैधानिक और पर्यावरण से जुड़े मामलों में फैसले दिए हैं.
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- जस्टिस श्री चंद्रशेखर (Justice Shree Chandrashekhar)
ये बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर तैनात थे. इनका मूल हाई कोर्ट झारखंड है. दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने वाले जस्टिस चंद्रशेखर के आने से सुप्रीम कोर्ट में झारखंड का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित हुआ है.
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- जस्टिस संजीव सचदेवा (Justice Sanjeev Sachdeva)
जस्टिस सचदेवा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे और उनका मूल हाई कोर्ट दिल्ली है. वे साल 1995 में सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बने थे और साल 2013 में दिल्ली हाई कोर्ट के जज नियुक्त हुए थे.
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- जस्टिस अरुण पल्ली (Justice Arun Palli)
प्रमोशन से पहले वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उन्होंने 1988 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से वकालत शुरू की थी और साल 2013 में वहां जज बने थे.
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- सीनियर एडवोकेट वी. मोहना (Senior Advocate V. Mohana)
इस सूची में सबसे खास नाम वरिष्ठ वकील वी. मोहना का है. वे सीधे बार (वकील से) से सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली देश की दूसरी महिला वकील बन गई हैं. इनसे पहले जस्टिस इंदु मल्होत्रा साल 2018 में सीधे वकील से सुप्रीम कोर्ट की जज बनी थीं. कोयंबटूर से कानून की पढ़ाई करने वाली मोहना साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट नामित हुई थीं.
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क्यों खास हैं ये नियुक्तियां?
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ने से अदालतों में लंबित पड़े 92,000 से अधिक मामलों के निपटारे में तेजी आएगी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में अब नियमित तौर पर संविधान पीठ का गठन आसान हो सकेगा. इन नियुक्तियों में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, वरिष्ठता और लैंगिक विविधता का पूरा ध्यान रखा गया है.