Form 6 Additional Declaration: सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को क्लियर किया कि उसने चुनाव आयोग के बदले हुए ‘फॉर्म 6’ की वैलिडिटी पर कोई फैसला नहीं सुनाया है. इस फॉर्म का इस्तेमाल भारत के नागरिक वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए करते हैं. कोर्ट ने कहा कि बदला हुआ वर्जन बिहार में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) पर पिछली एक्सरसाइज के बाद लाया गया था. ये क्लेरिफिकेशन ECI के उस दावे पर चल रहे विवाद के बीच आई है जिसमें कहा गया था कि कोर्ट ने SIR प्रक्रिया के लिए ‘फॉर्म 6’ के साथ जोड़े गए एक एडिशनल डिक्लेरेशन को मंजूरी दी थी.
‘नए फॉर्म 6 पर कोई फैसला नहीं’
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अगुवाई वाली बेंच ने, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे, उन्होंने उन सुझावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि उनकी पिछली टिप्पणियों का मतलब बदले हुए फॉर्म को मंजूरी देना था. बेंच ने एक वकील से कहा, ‘हमारे मुंह में शब्द न डालें,’ और जोर देकर कहा कि उसने बदले हुए वर्जन को न तो मंजूरी दी थी और न ही खारिज किया था. जस्टिस बागची ने समझाया कि कोर्ट की पिछले कमेंट्स का मतलब सिर्फ ये था कि जब बिहार SIR फैसला सुनाया गया था, तब बदला हुआ फॉर्म मौजूद नहीं था. बेंच ने निर्देश दिया कि इस मामले को 27 अक्टूबर को SIR प्रॉसेस और ECI के कामकाज को चुनौती देने वाली दूसरी याचिकाओं के साथ लिस्ट किया जाए.
एडिशनल डिक्लेरेशन पर विवाद
विवाद एक एडिशनल डिक्लेरेशन पर केंद्रित है जिसमें आवेदकों से पूछा जाता है कि क्या उनके नाम, या उनके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी के नाम, पहले की SIR प्रक्रिया के दौरान तैयार की गई वोटर लिस्ट में थे. याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि क्या ECI वोटर लिस्ट के नियमों में बदलाव के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ऑनलाइन फॉर्म के जरिए ऐसी जरूरत लागू कर सकता है. ‘फॉर्म 6’ ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के तहत तय किया गया है. ये नियम केंद्र सरकार की तरफ ECI के साथ सलाह-मशविरा करके ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950’ के तहत बनाए गए हैं.
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ECI ने क्या कहा?
चुनाव आयोग का कहना है कि तय ‘फॉर्म 6’ में कोई बदलाव नहीं किया गया है और एडिशनल डिक्लेरेशन खास तौर पर SIR पीरियड के लिए लाया गया था. 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने उन रिकॉर्ड्स की मांग की थी जिनसे पता चले कि बदलावों को मंजूरी किसने दी और उनका कानूनी आधार क्या था. जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां से एडिशनल डिक्लेरेशन वापस ले लिया गया है. 27 अक्टूबर 2026 की सुनवाई में इस जरूरत की वैलिडिटी और वोटर रजिस्ट्रेशन पर इसके असर की जांच होने की उम्मीद है.