दिल्ली हाई कोर्ट ने 21 अक्तूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान फ्रांस में छात्रों के नेतृत्व वाले उन प्रदर्शनों का जिक्र किया, जो कथित तौर पर आगजनी और लूटपाट में बदल गए थे. सुनवाई के दौरान, अदालत ने सार्वजनिक प्रदर्शनों के लिए पुलिस की इजाजत लेने की अहमियत पर जोर दिया. कोर्ट ने कहा कि ये पाबंदियां इसलिए भी लगाई जाती हैं ताकि बाहरी या अनधिकृत लोग प्रोटेस्ट में शामिल होकर कोई गड़बड़ी न फैला सकें.
जंतर-मंतर को लेकर कोर्ट ने उठाए सवाल
ये कमेंट तब आया जब हाई कोर्ट सीजेपी नेताओं की उस याचिका पर तुरंत सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें उन्होंने अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी थीय उनकी हिरासत बुधवार को खत्म होने वाली थी. सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के फैसले पर सवाल उठाया, जबकि इस जगह को आधिकारिक तौर पर प्रदर्शन स्थल के रूप में हटा दिया गया था.
बैरिकेड्स पर अदालत की टिप्पणी
बैरिकेड्स के मकसद पर जोर देते हुए, कोर्ट ने कहा कि इन्हें तोड़ने से प्रदर्शन में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिनमें ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो ऑर्गेनाइजर्स के कंट्रोल में न हों. कोर्ट ने सुरक्षा इंतजामों को तोड़ने के संभावित नतीजों की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘बैरिकेड्स किसी खास मकसद से लगाए जाते हैं.’
फ्रांस में हुई भारी हिंसा
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई बार हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं. शिक्षा का स्तर, पेंशन सुधार, पुलिस कार्रवाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ हुए प्रोटेस्ट में कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं. हिंसा के दौरान गाड़ियों, दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए आंसू गैस और दूसरे उपायों का इस्तेमाल किया. इन घटनाओं के कारण जनजीवन और ट्रैफिक पर असर पड़ा.
‘आप GenZ नहीं हैं’
अदालत ने सीजेपी नेताओं की उम्र भी पूछी. जब बताया गया कि उनकी उम्र 27 और 31 साल है, तो अदालत ने कहा कि रांका और दास GenZ नहीं हैं, और फिर CJP के मकसद पर सवाल उठाए. अदालत ने कहा, ‘तो फिर आप जेन-जी नहीं हैं. किस उम्र के लोगों को ‘मिलेनियल्स’ कहा जाता है? पहले ये छात्रों का विरोध-प्रदर्शन था, जिसमें बच्चे शामिल थे, लेकिन अब मकसद कुछ और है. लोग तो वही हैं, पर मकसद बदल गया है.’
अदालत ने सीजेपी नेताओं के वकील से कहा, ‘अगला सवाल ये है कि आप कौन हैं? आप क्या हैं? आप किस संगठन से जुड़े हैं? उस संगठन का मकसद क्या है? जब शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका हो, तो ये सभी सवाल अहम हो जाते हैं.’ कोर्ट ने सीजेपी नेताओं के वकील को सलाह दी कि वो शाम को मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने तक इंतजार करें. इसके बाद वकील ने अपनी याचिका वापस ले ली.