AI समिट में विरोध पर अकादमिक जगत की कड़ी प्रतिक्रिया, 160 शिक्षाविदों ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit के दौरान हुए विरोध पर 160 शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई. Indian Youth Congress के प्रदर्शन को राष्ट्रीय छवि के लिए हानिकारक बताया गया, जबकि समिट में 37 देशों और 41 वैश्विक टेक कंपनियों ने भाग लिया.

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नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर देश के 160 प्रमुख शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने इस घटना को “गंभीर रूप से खेदजनक और गलत सोच पर आधारित” बताया है.

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शिक्षाविदों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि Indian Youth Congress द्वारा किया गया यह विरोध इस बात को दर्शाता है कि विपक्ष लोकतांत्रिक असहमति और वैश्विक मंच पर राष्ट्रीय प्रतिष्ठा की रक्षा के बीच अंतर करने में विफल रहा है.

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उन्होंने कहा कि यह विरोध, जो राहुल गांधी से जुड़ा बताया गया, ऐसे समय हुआ जब दुनिया भर के निवेशक और तकनीकी क्षेत्र के नेता भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीकों में एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में देख रहे थे. इस तरह की घटनाएं भारत की वैश्विक छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं.

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बयान में यह भी कहा गया कि एक सांसद के रूप में यह संवैधानिक जिम्मेदारी होती है कि वह रचनात्मक आलोचना और ऐसे कदमों के बीच अंतर करे, जो अनजाने में देश की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को कमजोर कर सकते हैं.

इस संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में Jawaharlal Nehru University की कुलपति संतिश्री धुलिपुडी पंडित, IIT रुड़की, IIT धारवाड़ और IIT जोधपुर के निदेशक समेत कई विश्वविद्यालयों के कुलपति और प्रोफेसर शामिल हैं.

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गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार Bharat Mandapam में आयोजित AI Impact Summit के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था. प्रदर्शनकारी बिना शर्ट के हॉल में घूमते हुए सरकार और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लिखी टी-शर्ट दिखा रहे थे, जिन्हें बाद में सुरक्षा कर्मियों ने बाहर कर दिया. इस मामले में Delhi Police अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.

शिक्षाविदों ने कहा कि AI Impact Summit भारत के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और सभ्यतागत क्षण था, जहां देश ने खुद को चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर में एक सक्षम और संप्रभु तकनीकी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया. ऐसे मंच को राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम बनाना गंभीर निर्णयहीनता को दर्शाता है.

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उन्होंने यह भी कहा कि जब चीन और पाकिस्तान जैसे देश इस समिट के महत्व को कमतर आंकने की कोशिश कर रहे थे, तब देश के भीतर इस तरह का व्यवहार उन नैरेटिव्स को मजबूती दे सकता है, जो भारत की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं.

बयान में कहा गया कि भारत की AI क्षेत्र में प्रगति वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्यमियों और संस्थानों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है. इस समिट में 644 AI तकनीकों का प्रदर्शन हुआ, 37 देशों के 326 प्रदर्शकों ने भाग लिया और करीब पांच लाख लोगों ने इसमें हिस्सा लिया.

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इसके अलावा, 41 वैश्विक टेक कंपनियों के CEO की मौजूदगी ने भारत के AI इकोसिस्टम में अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाया. समिट के दौरान 250 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव भी सामने आए, जो भारत की तकनीकी क्षमता में वैश्विक भरोसे को रेखांकित करते हैं.

शिक्षाविदों के अनुसार, तीन स्वदेशी बड़े भाषा मॉडल (LLMs) का अनावरण इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल वैश्विक तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसे विकसित करने वाला देश बन रहा है.

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उन्होंने कहा कि यह समिट भारत की तकनीकी प्रगति और वैश्विक भूमिका के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा.

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