बंगाल सरकार के विभिन्न विभागों या कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी एक-एक करके इस्तीफा दे रहे हैं. इस बार शिक्षा विभाग में भी इस्तीफे की खबर है. महत्वपूर्ण पदों पर आसीन दो अधिकारियों के इस्तीफे के पत्र शिक्षा विभाग तक पहुंच चुके हैं. उन्होंने एक के बाद एक अपने इस्तीफे भेजे हैं. विद्यालय सेवा आयोग (एसएससी) के अध्यक्ष सिद्धार्थ मजूमदार और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रामानुज गंगोपाध्याय ने पद से इस्तीफा दे दिया है.
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शिक्षा विभाग में नई सरकार की ‘कार्रवाई’
तृणमूल सरकार के दौरान शिक्षा विभाग पर भ्रष्टाचार के सबसे अधिक आरोप लगे. मंत्रियों की गिरफ्तारियां हुईं और बोर्डों एवं आयोगों के प्रमुखों को भी बदला गया. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि तृणमूल सरकार की पूरी संरचना को ध्वस्त किया जा रहा है. यही कारण है कि राज्य में नवगठित भाजपा सरकार शिक्षा विभाग में कई ‘कार्रवाई’ कर रही है. शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए खुले तौर पर बदलाव किए जा रहे हैं.
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4 साल, 4 महीने तक रहे पद पर
बता दें कि भर्ती में भ्रष्टाचार के बीच, तत्कालीन राज्य सरकार ने तत्कालीन न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की सलाह पर एसएससी के अध्यक्ष का पद बदल दिया. 2022 में सिद्धार्थ मजूमदार को अध्यक्ष नियुक्त किया गया. उनके कार्यकाल में ही एसएससी भर्ती परीक्षा भी आयोजित की गई थी. सिद्धार्थ को पिछले जनवरी में इस पद से सेवानिवृत्त होना था, लेकिन राज्य सरकार ने उनका कार्यकाल 6 महीने के लिए बढ़ा दिया. कुल मिलाकर, सिद्धार्थ मजूमदार 4 साल और 4 महीने तक इस पद पर रहे. उन्होंने शिक्षा विभाग के सचिव को अपना त्यागपत्र भेज दिया है.
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