कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने मंगलवार को अपने पति और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से जुड़े एक किस्से का खुलासा करते हुए कहा कि जब राजीव को प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया था, तो वह पूरी तरह इसके विरोध में थीं. उन्होंने 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली अपनी किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के बारे में बात करते हुए यह भी कहा कि उनके बारे में दशकों से दूसरे लोग कहानी बताते आए हैं और अब अपनी कहानी कहने की उनकी बारी है. सोनिया गांधी ने कहा कि किताब सामने आने पर कुछ ‘तमाशा’ होना तय है.
सोनिया नहीं चाहती थीं प्रधानमंत्री बनें राजीव गांधी
सोनिया गांधी ने ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने अपने जीवन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर बात की है. वीडियो में राजीव गांधी का जिक्र करते हुए सोनिया ने कहा, ‘जब मेरे पति से प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया था, मैं इसके पूरी तरह विरोध में थी.’ हालांकि, उन्होंने वीडियो में इस मुद्दे पर और गहराई से कुछ नहीं कहा. सोनिया गांधी एक जगह कहती हैं, ‘मुझे नहीं पता कि मुझे पूरी कहानी बतानी चाहिए या नहीं.’
‘अब कहानी बताने की बारी मेरी’
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राजीव गांधी पहली बार 31 अक्टूबर, 1984 को भारत के प्रधानमंत्री बने थे. उनकी मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्होंने यह पद संभाला. उस समय राजीव गांधी 40 वर्ष के थे और भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने. सोनिया गांधी ने वीडियो शेयर करते हुए कहा, ‘इस किताब के आने पर कुछ तमाशा तो होना ही है. आखिरकार, दूसरे लोग दशकों से मेरी ‘कहानी’ बताते आए हैं, अब मेरी बारी है.’
‘मेरे बारे में काफी कुछ पूरी तरह सही नहीं’
उन्होंने अपनी कहानी खुद लिखने के पीछे की वजह का खुलासा करते हुए कहा कि उनके बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन उसमें से काफी कुछ पूरी तरह सही नहीं था. सोनिया ने कहा, ‘मुझे लगा कि चूंकि मेरे बारे में बहुत कुछ लिखा गया है और उसमें से काफी कुछ पूरी तरह सही नहीं था, या फिर वह गढ़ा गया था या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था. इसलिए मुझे लगा कि अब मैं अपनी कहानी लिख सकती हूं और तथ्यों-चीजों को वैसे ही बता सकती हूं, जैसी वे वास्तव में थीं.’ कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि वह इसे अपना वर्जन नहीं, बल्कि अपनी कहानी बताना चाहेंगी.