Sonam Wangchuk On CJP Protest: सोशल एक्टिविट्स सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर एक अहम दावा किया है. उन्होंने बताया कि 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन के नेता काफी निराश हो गए थे और उसे लगने लगा था कि प्रोटेस्ट तकरीबन खत्म हो चुका है. हालांकि बाद में ये आंदोलन कामयाब रहा क्योंकि छात्रों की मांग पर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था.
'हौसला टूटने लगा था'
प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान वांगचुक ने कहा कि 20 जुलाई 2026 को पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शन का मंच हटा दिया गया था और बड़ी तादाद में लोग वहां से चले गए थे. उनके मुताबिक, उस वक्त CJP के नेताओं का मनोबल इतना गिर गया था कि वो प्रदर्शनकारियों को घर लौटने के लिए संदेश जारी करने पर विचार कर रहे थे.
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CJP नेताओं को लगा आंदोलन खत्म हो गया
वांगचुक के मुताबिक सीजेपी लीडरशिप ने उनसे ऐसा मैसेज तैयार करने को कहा था, जिसमें प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर खाली कर घर जाकर आराम करने की अपील की जाए. उनका कहना है कि नेताओं को लग रहा था कि बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारी उसी रात वापस चले गए हैं और अब आंदोलन को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा. उन्होंने बताया कि उन्होंने ऐसा संदेश तैयार भी किया था, लेकिन आखिरकार उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं किया गया. उस वक्त आयोजकों के बीच ये विचार था कि अगर अगले दिन प्रदर्शन फिर से शुरू होता है तो आंदोलन जारी रखा जाएगा, नहीं तो इसे खत्म माना जा सकता है.
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अगले दिन बदला माहौल
सोनम वांगचुक ने बताया कि अगले दिन बड़ी तादाद में युवा जंतर-मंतर पर दोबारा पहुंचने लगे. पुलिस की कार्रवाई और लाठीचार्ज के बावजूद युवाओं के लौटने से आंदोलन की लीडरशिप का कॉन्फिडेंस फिर बढ़ा. उन्होंने प्रदर्शनकारियों की तारीफ करते हुए कहा कि मंच हटाए जाने और पुलिस कार्रवाई के बाद भी प्रोटेस्ट साइट पर लौटने वाले युवाओं ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी. वांगचुक के मुताबिक, प्रदर्शन में मौजूद लोगों की संख्या और उनका उत्साह सीजेपी लीडरशिप के मनोबल पर सीधा असर डाल रहा था. जब लोग वहां से चले गए, तो नेताओं को लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है. लेकिन युवाओं की वापसी ने उन्हें आंदोलन जारी रखने का भरोसा दिया.
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