Sonam Wangchuk Hunger Strike LIVE: दिग्गज सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने लद्दाख के पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है. लद्दाख के लिए छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की तानाशाही बिल्कुल ठीक नहीं है.
अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि से बयान जारी कर कहा कि वांगचुक पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से अनशन कर रहे हैं. सरकार को उनके अनशन को हल्के में नहीं लेना चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह अहंकार छोड़कर तुरंत आगे आए, वांगचुक से बातचीत का रास्ता साफ करे और उनकी मांगों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए.
Sonam Wangchuk Hunger Strike LIVE: NEET पेपर लीक मामले और छात्रों के मुद्दों को लेकर 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया है. भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर में पानी की गंभीर कमी और पोटैशियम का स्तर गिरने जैसे लक्षण दिखे हैं, जिसके चलते डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत इलाज की सलाह दी है. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, गंभीर स्थिति के बावजूद सोनम वांगचुक ने ड्रिप (IV फ्लूइड) और कोई भी अन्य दवाई लेने से साफ इनकार कर दिया है. उनकी पत्नी गीतांजलि ने भी अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर बिना मर्जी के कोई इलाज न देने को कहा है. डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है और उन्हें इलाज के लिए मनाने की कोशिशों में जुटी है.
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Sonam Wangchuk Hunger Strike LIVE: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को वहां से हटाए जाने की कड़ी निंदा करते हुए इसे पूरी तरह गलत बताया। इसके साथ ही उन्होंने देश में पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी ताकत भारतीय छात्रों और उनके हक की आवाज उठाने वालों को दबा नहीं सकती।
सोनम वांगचुक मामले में CJI सूर्यकांत को एक पत्र याचिका (Letter Petition) भेजी गयी है जिसमें सोनम वांगचुक और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अन्य प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए CJI के निर्देश की मांग की गई है. यह याचिका अधिवक्ता नरेन्द्र मिश्रा के द्वारा दायर की गयी है.
याचिका में कहा गया है कि वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन अस्पताल ले जाया गया, जबकि वे शांतिपूर्ण तरीके से उपवास कर रहे थे. इसमें मांग की गई है कि उन्हें “मेडिकल सुविधा” में ही उपवास जारी रखने की अनुमति दी जाए और उनके साथ किसी भी तरह का बलपूर्वक हस्तक्षेप न हो.
पत्र याचिका में कहा गया है कि NEET paper leak का मुद्दा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए जंतर मंतर पर उनके शांतिपूर्ण विरोध को किसी भी तरह से रोका नहीं जाना चाहिए.
याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए और इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता की जांच हो. वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति और उनके स्थानांतरण को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है. (इनपुट: संजीव त्रिवेदी)
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सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि डी. अंगमो ने सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को पत्र लिखकर उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है. पत्र में कहा गया है कि शनिवार सुबह अस्पताल की टीम ने बताया कि सोनम वांगचुक का पोटेशियम स्तर घटकर 2.9 रह गया है, जबकि 17 जुलाई की शाम 4:16 बजे हुई जांच में यह 4.3 था.
पत्र में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल प्रशासन से जांच रिपोर्ट की डिजिटल या हार्ड कॉपी मांगी गई, लेकिन उसे साझा करने से इनकार कर दिया गया. साथ ही, पिछले 20 दिनों से उनकी निगरानी कर रहे नियमित डॉक्टरों को भी सोनम वांगचुक से मिलने की अनुमति नहीं दी गई.
गीतांजलि डी. अंगमो ने कहा कि पारदर्शिता की कमी के चलते अस्पताल पर उनका भरोसा कम हुआ है. इसलिए उन्होंने सोनम वांगचुक को अपनी पसंद के किसी दूसरे मेडिकल सेंटर में शिफ्ट करने का फैसला लिया है. उन्होंने अस्पताल प्रशासन से जल्द से जल्द डिस्चार्ज की सभी औपचारिकताएं पूरी करने का अनुरोध किया है, ताकि उन्हें बेहतर इलाज और सटीक मेडिकल जांच के लिए दूसरे अस्पताल ले जाया जा सके.
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने कहा कि अदालत ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है कि उन्हें अस्पताल से किसी दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाए. उनका कहना है कि यदि स्वास्थ्य की निगरानी और इलाज की आवश्यकता है, तो यह धरना स्थल पर भी किया जा सकता है. उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि सोनम वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी देकर धरना स्थल पर जाने की अनुमति दी जाए.
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भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर शनिवार को नया बयान सामने आया. उनके नियमित डॉक्टर ने सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों से मुलाकात के बाद बताया कि फिलहाल सोनम वांगचुक को केवल ओरल इलेक्ट्रोलाइट्स दिए जा रहे हैं, उन्हें कोई आईवी फ्लूड नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति में कल की तुलना में कोई खास बदलाव नहीं है. हालांकि, अस्पताल की ओर से पोटेशियम स्तर मे बदलाव की बात कही जा रही है, जिस पर उन्होंने अलग से जांच कराने की मांग की है.
ममता बनर्जी ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘सोनम वांगचुक की सेहत और भलाई को लेकर मुझे गहरी चिंता है. उन्होंने सिर्फ बातचीत की मांग की थी, फिर भी हफ्तो से उनकी अपील पर कोई जवाब नहीं दिया गया है. लोकतंत्र में, शांतिपूर्ण विरोध पर बातचीत होनी चाहिए, न कि उसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए. उनकी आवाज को वैसे ही नजरअंदाज किया गया है, जैसे अनगिनत युवा भारतीयों की आवाज को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा है. उन्हें किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाने की इजाजत मिलनी चाहिए, और अगर जरूरत हो तो नागरिक इसका खर्च उठाने के लिए आजाद हों. जनता का भरोसा पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान से बनता है – न कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने या बातचीत से इनकार करने से. जो सरकार असहमति को लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के बजाय खतरा मानती है, वह जवाबदेही से बचते हुए भरोसे की उम्मीद नहीं कर सकती.’
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कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, आज केंद्र सरकार ने जिस तरह ताकत के ज़रिए एक शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचला है..यह शर्मनाक है..इससे समझ आता है सरकार डरी हुई है..एक अनशन पर बैठे शख्स को घसीटकर अस्पताल में भर्ती कर रहे..यह क्या तरीका है? सरकार संवाद नही करती है..सोनम वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए थी..शिक्षण मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे की मांग गलत नही है..देश के युवाओं से pm संवाद नहीं करना चाहते.
डॉ चारु बम्बा सुप्रटेंडेंट सफदरगंज हॉस्पिटल की MS ने बाइट दी है. इनका कहना है कि उन्हें 7.40 पर एडमिट किया गया. लंबे समय से भूख हड़ताल पर होने की वजह से उनको डीहाइड्रेशन हो गया था. डीहाइड्रेशन के लिए इलाज हो रहा है.
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सोनम वांगचुक को जिस अस्पताल कक्ष में रखा गया है, वहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. अस्पताल प्रशासन और पुलिस की ओर से मेडिकल रिपोर्ट साझा नहीं की जा रही है, जबकि कमरे के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की भी अनुमति नहीं है. इस बीच, सोनम वांगचुक के वकील और उनके निजी डॉक्टरों को मुलाकात की अनुमति दे दी गई है. स्वास्थ्य स्थिति को लेकर फिलहाल आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन का इंतजार किया जा रहा है.
सचिन पायलट ने कहा- यह आश्चर्यजनक काम है कि उन्हें इस तरह से उठाया गया है. पूरे देश में आक्रोश है. और जो बहुत ही शांति पुर्ण रूप से यह हड़ताल चल रही थी उसको खत्म करने की कोशिश की गई. सरकार नही चाहती उससे कोई सवाल पूछे, कोई शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगे. सरकार ने ना तो सोनम वांगचुग की बात सुनी, ना तो डायलॉग किया सरकार ने अपने किसी प्रतिनिधि को बातचीत के जरिए समाधान खोजने उनके पास भेजा. यह बताता है कि वह पूरी तरह बौखला गई है.
उसे इस बात का डर भी सता रहा है कि जनमानस उसके खिलाफ हो गया है. यह घटना बताती है कि जनता का विश्वास सरकार पर से खत्म हो गया है. वह तो जनता जो सवाल पूछ रही थी उसी को लेकर आंदोलन कर रहे थे. जिस तरीके से उन्हें उठाया गया यह बताता है कि सरकार का मूड नहीं है कि वह जनता की आवाज को सुने! इससे जनता का आक्रोश खत्म होने वाला नहीं है. नौजवान लोग सरकार की जवाबदेही तय करना चाहते हैं.
इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस का स्टैंड साफ है राहुल गांधी ने कोटा से जो अभियान शुरू किया था वह देशभर में अब बढ़ रहा है. जो लोग पेपर लिक कर रहे हैं वह उन्हें सजा दिलाना चाहते हैं. यह तो न्याय पूर्ण कार्य है. जिसमें कोई संकोच सरकार को नहीं करना चाहिए. भले ही NEET पर्चे लिक मामले के सीबीआई जांच चल रही है लेकिन कितने लोगों की जवाब दे ही तय हुई यह सबके सामने है.
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टिकटेक विजेता दहिया (CJP) ने कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित मार्च हर हाल में निकाला जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी गिरफ्तारी देने के लिए भी तैयार हैं। दहिया ने आरोप लगाया कि आज सुबह जो घटनाक्रम हुआ, वह नहीं होना चाहिए था और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की.
सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद CJP एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके की भूख हड़ताल शुरू. जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में वामपंथी छात्र संगठन भी शामिल हुए.
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सोनम वांगचुक को जरूरी इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है. लंबे समय तक अनशन और डिहाइड्रेशन की वजह से वे कमजोर हो गए हैं. हालांकि अभी उनकी हालत स्थिर है, लेकिन शरीर के पैरामीटर्स को सामान्य करने के लिए उन्हें लगातार निगरानी और इलाज की जरूरत है.
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नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा ने कहा, ‘माननीय हाई कोर्ट के आदेशानुसार और स्वास्थ्य की स्थिति व मेडिकल सलाह के मद्देनजर सोनम वांगचुक को यहां से सरकारी अस्पताल इलाज के लिए ले जाया गया है। किसी तरह का कोई लाठीचार्ज नहीं किया गया है.’
जंतर-मंतर पर अभिजीत डिपके समेत CJP के प्रदर्शनकारी अभी भी धरने पर बैठे हुए हैं और नारेबाजी जारी है. स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है. इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है तथा चारों ओर बैरिकेडिंग कर आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. अधिकारियों के अनुसार, आगे की रणनीति स्थिति की समीक्षा के बाद तय की जाएगी.
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों, विशेषकर सोनम वांगचुक के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. मौके पर पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है.
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सफदरजंग अस्पताल के PRO ने कहा, ‘आपकी जानकारी के लिए सूचित किया जाता है कि श्री सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है. फिलहाल उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों द्वारा उनका चिकित्सीय परीक्षण किया जा रहा है. इस संबंध में अस्पताल की ओर से आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति 9.30 तक जारी की जाएगी. अस्पताल के डॉक्टर ये जानकारी देंगे.
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Sonam Wangchuk Updates: लद्दाख के मशहूर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक बीते 20 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, 21वें दिन यानी शनिवार की सुबह ही अचानक उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दिल्ली पुलिस की एक टीम डॉक्टरों से शनिवार सुबह जंतर-मंतर पर पहुंची, जहां पहले उनका चेकअप किया गया और फिर एंबुलेंस में वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया गया. पुलिस के इस एक्शन पर सीजेपी कार्यकर्ताओं का गुस्सा देखने को मिला, जंतर-मंतर पर समर्थकों ने जमकर विरोध किया और नारे लगाए. उधर, पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
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