देश-दुनिया में मशहूर शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठै हैं. दिल्ली में जंतर-मंतर पर 28 जून से उनका आमरण अनशन जारी है. सिर्फ नमक वाला पानी पीकर वे जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. क्योंकि उनका वजन लगातार गिर रहा है, इसलिए डॉक्टरों ने उन्हें स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चेतावनी भी दी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल भी भूख हड़ताल कर चुके हैं और उनका अनशन खुद उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जूस पिलाकर तुड़वाया था.
1984 में SC दर्ज के लिए की थी हड़ताल
सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल लद्दाख क्रांतिकारी नेता थे, जो 1975 में जम्मू-कश्मीर की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं. वहीं जनवरी 1984 में उन्होंने लेह-लद्दाख को अनसूचित जाति (ST) का दर्जा दिलाने के लिए भूख हड़ताल की थी और इसके परिणामस्वरूप लद्दाख को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा मिला था. 5 दिन की भूख हड़ताल के बाद उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी खुद सोनम वांग्याल का अनशन तुड़वाने के लिए लेह पहुंची थीं और जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया था, दर्जा दिलाने का आश्वासन दिया था.
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इन 8 जातियों को मिला था ST का दर्जा
सोनम वांग्याल की भूख हड़ताल का ही परिणाम था कि 1989 में लेह-लद्दाख को अनुसूचित जाति (SC) नहीं, बल्कि अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा मिला. आज लेह-लद्दाख के 97% से ज्यादा लोग अनुसूचित जनजाति (ST) में आते हैं. 7 अक्टूबर 1989 को इंदिरा गांधी की सरकार ने लेह-लद्दाख की 8 जातियों और समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने का ऐलान किया था. वहीं जिन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्ज मिला है, उनमें बाल्टी, बेडा, बोट/बोटो, ब्रोकपा, चांगपा, गर्रा, मोन और पुरिगपा समुदाय शामिल है.
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सोनम राज्य दर्जे के लिए कर चुके अनशन
पिता सोनम वांग्याल के नक्शेकदम पर चलते हुए सोनम वांगचुक भी लेह-लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने के लिए भूख हड़ताल कर चुके हैं. लेह-लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए भूख हड़ताल कर चुके हैं. वर्तमान में वे देश में नीट पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के चलते देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं. देश के केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इस आंदोलन में उनका साथ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) दे रही है.
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-10°C तापमान में जलवायु अनशन कर चुका
दिल्ली में हड़ताल से पहले सोनम वांगचुक मार्च 2024 में 21 दिन का 'जलवायु अनशन' कर चुके हैं. उस समय लेह-लद्दाख का तापमान (-10°C) था, लेकिन बावजूद इसके लेह-लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए उन्होंने अनशन किया था. इसके बाद सितंबर-अक्टूबर 2024 में सोनम वांगचुक ने दिल्ली चलो मार्च निकाला था. वे लेह-लद्दाख से पैदल मार्च निकालते हुए 1000 किलोमीटर का सफर तय करके दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन दिल्ली बॉर्डर पर उन्हें गिरफ्तार किया था.
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सितंबर 2025 में विरोध प्रदर्शन में हुई थी हिंसा
सितंबर 2025 में आनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार से चल रही बातचीत फेल होने पर उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन उनका यह विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था. उस समय सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था. उन्हें राजस्थान की जोधपुर जेल में लिखा गया था. लेकिन पत्नी गीतांजलि के प्रयासों से मार्च 2026 में वे रिहा हो गए थे. अब वे दिल्ली में देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन इस अभियान की शुरुआत कॉकरोच जनता पार्टी ने की थी.
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