'न्याय और अन्याय के बीच अंतर…', भारत की अदालतों में लंबित मामलों पर CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान

सीजेआई ने न्यायपालिका, विशेष रूप से संवैधानिक अदालतों से अपनी कार्यप्रणाली पर आत्ममंथन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मामलों की सुनवाई और लिस्टिंग की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और अनुमान लगाने योग्य बनाने की जरूरत है.

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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत. (Photo: ANI)

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और महत्वपूर्ण मामलों में समय पर सुनवाई की जरूरत को लेकर बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि न्याय और अन्याय के बीच का वास्तविक अंतर सिर्फ अंतिम फैसले से तय नहीं होता, बल्कि यह भी मायने रखता है कि अदाल’न्याय और अन्याय के बीच अंतर…’, भारत की अदालतों में लंबित मामलों पर CJI सूर्यकांत का बड़ा बयानत ने जरूरत पड़ने पर कितनी जल्दी हस्तक्षेप किया. सीजेआई ने न्यायपालिका, विशेष रूप से संवैधानिक अदालतों से अपनी कार्यप्रणाली पर आत्ममंथन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मामलों की सुनवाई और लिस्टिंग की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और अनुमान लगाने योग्य बनाने की जरूरत है.

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न्यायिक व्यवस्था की ताकत देशभर में फैले हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि भारत में संवैधानिक न्याय की शुरुआत और उसका अंत सिर्फ नई दिल्ली तक सीमित नहीं है. देशभर में फैले 25 हाई कोर्ट न्यायिक व्यवस्था की मजबूत नींव हैं. इन अदालतों पर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और कानून का शासन कायम रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट स्थानीय परिस्थितियों और आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं से अधिक करीब से जुड़े होते हैं. इसलिए वे लोगों की जरूरतों को समझने और उनके विवादों का समाधान निकालने में बेहतर स्थिति में हैं.

अनुच्छेद 226 को बताया न्यायिक व्यवस्था की बड़ी ताकत

सीजेआई ने संविधान के अनुच्छेद 226 के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह हाईकोर्ट को व्यापक संवैधानिक शक्तियां प्रदान करता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 32 के तहत नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं, जबकि अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों के संरक्षण के लिए भी रिट और निर्देश जारी करने की शक्ति देता है.

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उन्होंने कहा कि इस व्यापक अधिकार क्षेत्र के कारण हाईकोर्ट कानूनी, वैधानिक, प्रशासनिक और संविदात्मक विवादों में प्रभावी हस्तक्षेप कर सकते हैं. इसके साथ ही, किसी मामले में संभावित नुकसान को रोकने के लिए समय पर अंतरिम राहत देना भी उनकी अहम जिम्मेदारी है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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