दुकानदार सावधान! ग्राहक का UPI Payment करने का मैसेज तो आएगा, लेकिन अकाउंट में पेमेंट नहीं!
Edited By Naresh Chaudhary

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UPI Payment Fake Google App: महाराष्ट्र के मुंबई से ऑनलाइन फ्रॉड का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां तीन युवकों ने गूगल प्ले स्टोर से एक ऐसा ऐप डाउनलोड किया, जिससे पेमेंट के भुगतान का सिर्फ मैसेज जाता है, जबकि पेमेंट नहीं जाता। रेस्तरां के खाते में पैसे नहीं आने पर मैनेजर ने पुलिस में शिकायत की। जांच में खुलासा होने पर पुलिस अधिकारी भी चौंक गए। उन्होंने कहा है कि वे गूगल को अपने प्ले स्टोर से इस एप्लिकेशन को हटाने के लिए पत्र लिखेंगे।
न्यूज साइट इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई पुलिस ने 19 से 21 साल के तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि तीनों ने इस सप्ताह में एक रेस्तरां के बिल भुगतान में धोखाधड़ी की। जांच में सामने आया है कि रेस्तरां प्रबंधक को भी एक मैसेज मिला था कि भुगतान कर दिया गया है। बाद में उन्होंने बैंक अकाउंट की जांच की तो उनके होश उड़ गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायत कर्ता के पास सिर्फ मैसेज आया था, पैसे नहीं आए थे। हालांकि मामला सामने आने पर आरोपियों के माता-पिता ने रेस्तरां वालों से संपर्क किया और उनके पैसे दिए।
आरसीएफ पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर रंजीत जाधव ने कहा कि पहले मामले में दो युवक 15 सितंबर की शाम 6.15 बजे शिव छाया रेस्तरां में पहुंचे। आरोपियों ने 1,810 रुपये के बिल के साथ एक पार्सल ऑर्डर किया। रेस्तरां मैनेजर से क्यूआर देने के लिए कहा। सामने आया है कि आरोपी ने गूगल प्ले स्टोर से एक खास ऐप डाउनलोड किया था। इसी ऐप का उपयोग करके क्यूआर कोड को स्कैन किया था।
उन्होंने बताया कि ये ऐप एक फर्जी मैसेज बनाता है। मैसेज को देखकर लगता है कि वास्तव में भुगतान हो गया है। इतना ही नहीं गूगल-पे या अन्य किसी पेमेंट ऐप की तरह ग्रीन टिक भी दिखाता है। इसके बाद आरोपियों ने मैनेजर को भुगतान का मैसेज दिया और वहां से चले गए। बाद में बैंक खातों का मिलान करते समय मैनेजर को एहसास हुआ कि पेमेंट में 1,810 रुपये कम हैं। इस पर मैनेजर ने चेंबूर में आरसीएफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया।
इसके बाद आरसीएफ पुलिस को वाशी नाका क्षेत्र में उसी आरसी रोड पर स्थित हरदीप पंजाब और कैलाश पंजाब रेस्तरां से दो और शिकायतें मिलीं। शिकायत में कहा गया है कि दो लोगों ने 1,400 रुपये और 3,260 रुपये का भुगतान किया था, लेकिन पैसे खाते में नहीं आए। जब पुलिस ने इस मामले की जांच की तो ये पहले मामले जैसा ही निकला। पुलिस ने आरोपी को वाशी नाका इलाके में ढूंढ निकाला। गिरफ्तार किए गए तीन युवाओं में से दो का चोरी का पुराना रिकॉर्ड रहा है।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की। जांच के दौरान उनके फोन में एक ऐप मिला, जिसका इस्तेमाल करके वे लोगों को ठग रहे थे। पुलिस अधिकारी ने कहा कि हम इस ऐप को प्ले स्टोर से हटाने के लिए गूगल का पत्र लिखेंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह पहली बार नहीं है जब धोखेबाजों द्वारा प्रतिष्ठानों को भुगतान का नकली मैसेज भेजने वाले ऐप का इस्तेमाल किया गया है।
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