केंद्र सरकार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को जल्द लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि महिला आरक्षण के तहत सीटों का निर्धारण कैसे किया जाएगा। इसी को लेकर सरकार नया फॉर्मूला तैयार कर रही है, जिसमें जनगणना और परिसीमन की अनिवार्य शर्तों को अलग करने पर गंभीर मंथन चल रहा है।
मौजूदा प्रावधानों में महिला आरक्षण लागू करने के लिए नई जनगणना और परिसीमन जरूरी है, लेकिन 2026-27 तक चलने वाली जनगणना के कारण इसमें देरी तय मानी जा रही थी। यही वजह है कि सरकार अब इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए इसे अलग करने का रास्ता तलाश रही है।
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सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक लोकसभा और विधानसभाओं में कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर करीब 816 की जा सकती है, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यानी कुल सीटों का 33% हिस्सा महिलाओं को मिलेगा।
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लाटरी सिस्टम से तय होगा महिलाओं के लिए आरक्षित सीट
सबसे अहम पहलू सीटों के निर्धारण का है। सूत्रों के अनुसार, इसके लिए लॉटरी सिस्टम अपनाया जा सकता है, जिसके तहत हर 15 साल में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का रोटेशन होगा। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा।
सामाजिक संतुलन का भी रखा जाएगा ध्यान
इसके साथ ही सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए SC और ST सीटों में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। SC सीटें 84 से बढ़ाकर 136 और ST सीटें 47 से बढ़ाकर 70 की जा सकती हैं। इन वर्गों के भीतर भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
सहयोगियों का सरकार को समर्थन
इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई विपक्षी और क्षेत्रीय दलों के साथ बैठक कर आम सहमति बनाने की कोशिश की है, वहीं एनडीए सहयोगियों से भी समर्थन का भरोसा मिला है। दूसरी ओर, कांग्रेस, TMC और DMK जैसे दल पहले से ही इस कानून को जनगणना और परिसीमन से अलग करने की मांग करते रहे हैं।
अगर सरकार मौजूदा बजट सत्र में इस संशोधन को पास कराने में सफल होती है, तो महिला आरक्षण की प्रक्रिया 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ही शुरू हो सकती है। ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ेगी।