सतुआ बाबा..ये वो नाम है जो इस समय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. सतुआ बाबा की लग्जरी लाइफस्टाइल देखकर हर कोई हैरान है. कहते हैं कि महज 11 साल की उम्र में सतुआ बाबा ने अपना घर-परिवार छोड़ दिया था. वहीं, इनका जन्म उत्तर प्रदेश के ललितपुर में हुआ था और इनका शुरुआती नाम संतोष तिवारी हुआ करता था. बाबा बने तो इनका नाम संतोष दास हो गया लेकिन फिर सतुआ खाने-खिलाने के बाद इनका नाम सतुआ बाबा पड़ा. अब लोगों के बीच ये सतुआ बाबा के नाम से ही जाने जाते हैं. इस समय सतुआ बाबा माघ मेले के चलते लोगों के बीच छाए हुए हैं.
कौन हैं सतुआ बाबा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सतुआ बाबा शोभाराम तिवारी और राजा बेटी तिवारी के चार बच्चों में से सबसे छोटे हैं. जानकारी के अनुसार, जब उनका स्कूली शिक्षा में मन नहीं लगा तो उन्होंने आध्यात्मिक शिक्षा हासिल करने के लिए अपना घर करीब 11 साल की उम्र में ही छोड़ दिया था. इसके बाद उनके बड़े भाई महेश तिवारी ही उन्हें वाराणसी के मणिकर्णिका घाट ले कर गए थे, जहां उन्हें मुख्य पुजारी यमुनाचार्य महाराज के मार्गदर्शन में विष्णु स्वामी संप्रदाय या सतुआ आश्रम में प्रवेश दिया गया. इसके बाद संतोष धार्मिक अध्ययन में लीन हो गए और वहां के पुजारियों के प्रिय शिष्य भी बन गए.
खबरों के अनुसार, कहा जा रहा है कि साल 2005 में ही संतोष दास ने सांसारिक जीवन को त्याग दिया था और फिर सन्यास ले लिया था. उनके गुरु ने जीवित रहते ही सतुआ बाबा को महामंडलेश्वर और उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था. वहीं, साल 2011 में यमुनाचार्य महाराज का निधन हो गया था, इसके बाद ही संतोष ने विष्णु स्वामी संप्रदाय का नेतृत्व संभाला था.
मिली जानकारी के अनुसार, साल 2012 में संतोष संप्रदाय के 57वें आचार्य बनाए गए थे और उन्हें ‘सत्तू बाबा’ की उपाधि दी गई थी.
योगी आदित्यनाथ ने भी की तारीफ
हाल ही में सतुआ बाबा राजनीति में भी खूब चर्चित चेहरा रहे हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म और आध्यात्मिक एकता को बढ़ावा देने के लिए सतुआ बाबा की तारीफ की थी.
सतुआ बाबा की कारों को लेकर हो रही खूब चर्चा
सतुआ बाबा को महाकुंभ 2025 के दौरान जगद्गुरु की उपाधि मिल चुकी है. सतुआ बाबा को काशी विश्वनाथ का प्रतिनिधि भी कहा जाता है. वहीं, माघ मेले में आश्रम बनाने के लिए सतुआ बाबा को सबसे ज्यादा जमीन आवंटित की गई.
सतुआ बाबा की चर्चा लोगों के बीच तब बढ़ी जब उनकी पोर्श 911 टर्बो (कीमत करीब 4.4 करोड़ रुपये) और लैंड रोवर डिफेंडर (कीमत करीब 3 करोड़ रुपये) की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं. इस बीच सोशल मीडिया पर सतुआ बाबा की महंगी लाइफस्टाइल, उनके ब्रांडेड चश्में, महंगी गाड़ियां और भगवा वस्त्र को लेकर लोग दो धड़ों में बटे हुए दिखाई दिए. कुछ लोगों ने उनकी आलोचना की तो वहीं कुछ लोगों ने समर्थन भी किया.
कितनी है सतुआ बाबा की नेटवर्थ?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सतुआ बाबा की कुल संपत्ति का लेखा जोखा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन खबरों के अनुसार उनकी कारों का संग्रह करीब 10 करोड़ रुपये का है. वहीं, लोगों के अनुमानों की बात करें तो संप्रदाय, जमीन और अन्य संपत्तियों को मिलाकर उनकी कुल संपत्ति 15 से 30 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है.
बनारस के आश्रम की कीमत 50 करोड़ रुपये
मिली जानकारी के अनुसार, सतुआ पीठ के पास अब उत्तर प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों में करोड़ों की संपत्तियां हैं. सिर्फ बनारस में ही स्थित आश्रम की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है. वहीं, सतुआ बाबा का कहना है कि ये संपत्तियां धार्मिक उद्देश्यों के लिए रखी गई हैं.
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