मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोमवार (6 अप्रैल) को सथानकुलम कस्टोडियल डेथ्स मामले में दोषी पाए गए सभी नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है. अदालत ने मृतकों के परिवार को कुल 1.40 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है, जो दोषी पुलिसकर्मी मिलकर देंगे. न्यायाधीश जी मुत्तुकुमारन ने फैसला देते हुए कहा कि यह एक दुर्लभ मामला है, जिसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मियों ने ही कानून के खिलाफ जाकर पिता-पुत्र के साथ बेरहमी से मारपीट की, जबकि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला भी दर्ज नहीं था.

क्या है मामला?

यह फैसला घटना के करीब छह साल बाद आया है, जिसमें 2020 में साथानकुलम पुलिस की हिरासत में जयाराज और उनके बेटे बेन्निक्स की मौत हो गई थी. आरोप था कि उन्होंने कोविड-19 नियमों का उल्लंघन करते हुए रात 9 बजे के बाद अपनी दुकान खुली रखी थी. 19 जून 2020 को पुलिस ने पिता-पुत्र को सथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाकर बुरी तरह पीटा और उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 188, 269, 294(बी), 353 और 506(2) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया. गंभीर चोटों की वजह से बेन्निक्स की 22 जून को और जयाराज की 23 जून को मृत्यु हो गई. अदालत ने इस मामले पर सु मोटो केस दर्ज किया था और पुलिस वालों को दोषी पाया.

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जांच में हुए कई खुलासे

जांच में खुलासा हुआ कि पुलिस ने रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की और सबूत मिटाने की भी कोशिश की. मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान में ये साफ हुआ कि दोनों को टॉर्चर किया गया और उन्हें गंभीर चोटें भी आईं. पुलिस पर ये भी आरोप है कि उन्होंने गवाहों को डराया-धमकाया और उनपर मुंह ना खोलने का दवाब भी बनाया. इसके बाद CBI ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया. आपको बता दें कि इस मामले में कुल 10 पुलिसकर्मी आरोपी थे, लेकिन एक सब-इंस्पेक्टर की कोविड के दौरान मौत हो गई थी. बाकी 9 पुलिसकर्मियों को अदालत ने दोषी करार दिया है.

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