भारत के एडवांस्ड वेदर सैटेलाइट (INSAT-3DR) ने अंतरिक्ष से एक ऐसी तस्वीर कैद की है, जो मानसून की भयावह और व्यापक सक्रियता को दर्शाती है. सैटेलाइट इमेज के मुताबिक, इस समय पश्चिम बंगाल की खाड़ी से लेकर जम्मू-कश्मीर तक लगभग 1500 किलोमीटर लंबी मानसूनी बादलों की एक घनी पट्टी बन चुकी है. यह विशालकाय मानसूनी पट्टी इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के एक बहुत बड़े हिस्से में भारी से अत्यंत भारी बारिश होने वाली है.
क्या है ये 1500 किमी लंबी पट्टी?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि बादलों का एक विशाल और निरंतर चलने वाला सिस्टम तैयार हुआ है. यह सिस्टम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा को पार करते हुए सीधे कश्मीर तक पहुंच रहा है. 1500 किलोमीटर के इस लंबे दायरे में लगातार घने, पानी से लदे मेघ बने हुए हैं, जो किसी भी समय मूसलाधार बारिश बनकर बरस सकते हैं.
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यह ‘ट्रफ’ दक्षिण-पश्चिम मानसून की रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है. यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाओं को अंदर तक खींचता है. जब यह ट्रफ उत्तर की ओर होता है, तो बारिश हिमालय की तलहटी तक ही सीमित रहती है, जिससे दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सहित उत्तरी मैदानी इलाके गर्म और ज्यादातर सूखे रह जाते हैं. इस जून में अब तक ऐसा ही होता रहा है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम का बदलता पैटर्न अब धीरे-धीरे सक्रिय मानसून की स्थिति की ओर बढ़ने के अनुकूल है.
इन राज्यों के लिए ‘रेड और ऑरेंज’ अलर्ट
इस सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण के बाद मौसम विभाग ने उत्तर और पूर्वी भारत के कई राज्यों के लिए चेतावनी जारी की है. उत्तर प्रदेश और बिहार में अगले 48 से 72 घंटों में कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है, निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.
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दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा में सुस्त पड़े मानसून की रफ्तार अब अचानक तेज होगी और जलभराव जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में इस बादलों की पट्टी के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन का गंभीर खतरा बढ़ गया है.
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