Sabse Bada Sawal: महंगाई भरे दिन बीते रे भइया....तेल कब तक निकालेगा हमारा 'तेल'?
Edited By Bhola Sharma

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Sabse Bada Sawal: नमस्कर। मैं हूं संदीप चौधरी। आज सबसे बड़े सवाल में हम बात करेंगे महंगाई की। महंगाई डायन की, जो हमें पिछले कई महीनों से खाए जा रही है। लेकिन वो गाना है न, दुख के दिन बीते रे भइया…।
एक खुश करने वाला दावा किया गया है। महंगाई के मोर्चे को लेकर। यह दावा किया है आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत कांत। वो कल कोटसी में थे। वे देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती की ताल ठोंकने के साथ-साथ यह भी कह दिया कि महंगाई का जो बुरा दौर था, अब वो पीछे छूट गया है। महंगाई बढ़ने की वो खबर पुरानी हो गई है। खबर पढ़ी, मन में लड्डू फूटा।
लेकिन अध्ययन किया। तो पता चला कि बीते साल दो महीने नवंबर और दिसंबर को छोड़कर 15 महीने में जो महंगाई चार फीसदी रखने का लक्ष्य रखा गया और कहा गया कि ये दो फीसदी अधिकतम और बढ़ सकती है। महंगाई 15 महीने में 13 बार लक्ष्मण रेखा को लांघती नजर आई है।
जनवरी फरवरी में तो साढ़े छह फीसदी से ऊपर महंगाई रही है। हर चीज के दाम बढ़ते दिख रहे हैं। 12 रुपए प्रति लीटर दूध के दाम बढ़ गए हैं। आटा, चावल, सरसो का तेल, राजमा का दाम काफी बढ़ा है।
आपको महंगाई का दर्द महसूस ही न हो, इसका खेल खेला जा रहा है। बिस्किट 5 रुपए का पहले भी था और अब भी है। पहले 80 ग्राम का था, अब 52 ग्राम का है। ढाई सौ ग्राम का चाय का पैकेट अब 200 ग्राम का हो गया है। रसोई गैस 1103 रुपए का हो गया है।
तो आज का सबसे बड़ा सवाल यही है कि महंगाई भरे दिन बीते भरे भइया?….तेल कब तक निकालेगा हमारा तेल? देखें पूरा VIDEO
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