Road Accident In India: दिल्ली के सुल्तानपुरी में रविवार तड़के हुए हादसे की पूरे देश में चर्चा है। देश में पिछले पांच साल में हुए सड़क हादसों के पैटर्न को देखें तो पता चलता है कि दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे के बीच का समय सड़कें जानलेवा बन जातीं हैं। परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में हुए कुल सड़क हादसों के 40 फीसदी इस समय के बीच हुए।
हादसों के आंकड़ों के मुताबिक, रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच के समय को सबसे सुरक्षित माना गया। 2021 में दर्ज सरकारी आकंड़ों के मुताबिक, कुल सड़क दुर्घटनाओं का 10 प्रतिशत से भी कम मामले इस समय के बीच दर्ज किए गए।
सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या यूपी में ज्यादा
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट 'भारत में सड़क दुर्घटनाएं- 2021' से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों की संख्या सबसे अधिक है।
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तमिलनाडु ने 2021 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज कीं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि सड़क दुर्घटनाएं और दुर्घटना से संबंधित मौतें की संख्या शहरों की तुलना में गांवों में अधिक थी।
2021 में 69 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं ग्रामीण इलाके में
2021 में करीब 69 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं ग्रामीण इलाकों में हुई जबकि देश में कुल मौतों का 31 प्रतिशत हिस्सा भी ग्रामीणों इलाकों में ही दर्ज की गई।
आंकड़ों के अनुसार, 2021 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में करीब 1.5 लाख लोगों की मौत हो गई, जबकि 3.8 लाख से अधिक लोग घायल हुए। सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक 18-45 आयु वर्ग के लोग प्रभावित हुए।
पिछले 5 साल 2017 से 2021 के बीच हुए सड़क हादसों की बात की जाए तो 2017 में सबसे ज्यादा सड़क हादसों के मामले दर्ज किए गए।
2018 में दोपहर 3 बजे से शाम 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा 1 लाख 68 हजार 605 सड़क हादसे हुए। 2020 में कोरोना लॉकडाउन की वजह से सड़क हादसों के सबसे कम 110 मामले दर्ज किए गए। 2020 को छोड़ दें तो 2017 से 2021 तक देश में शाम 6 से 9 बजे के बीच 85 हजार से ज्यादा सड़क हादसे दर्ज किए गए।
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