भारत इस साल अपना 77वां गणतंत्र दिवस बेहद उत्साह और जोश के साथ मनाने जा रहा है. इस बार दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड की मुख्य थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत’ रखी गई है. यह आयोजन न केवल भारत की सैन्य ताकत को दिखाएगा बल्कि देश की बढ़ती आर्थिक शक्ति और सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक होगा. सरकार का लक्ष्य इस परेड के जरिए दुनिया को यह संदेश देना है कि भारत अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और भविष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है. स्वतंत्रता के संघर्ष और आधुनिक भारत के विकास की कहानी इस बार परेड के हर हिस्से में नजर आएगी.
यूरोपीय संघ के दिग्गज होंगे मुख्य अतिथि
इस साल गणतंत्र दिवस के समारोह में खास अंतरराष्ट्रीय चमक देखने को मिलेगी. समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शामिल होंगी. यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ के इन शीर्ष नेताओं को एक साथ गणतंत्र दिवस के लिए आमंत्रित किया गया है. उनकी यह मौजूदगी भारत और यूरोप के बीच बढ़ते व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी. विश्व मंच पर भारत की बढ़ती साख को देखते हुए इन दिग्गज नेताओं का आना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से भी बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है.
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30 झांकियां और 2500 कलाकारों का अनोखा संगम
कर्तव्य पथ पर इस बार कुल 30 झांकियां अपनी खूबसूरती बिखेरेंगी. इनमें से 17 झांकियां अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होंगी जबकि 13 झांकियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की तैयार की गई हैं. इन झांकियों के साथ देश के कोने-कोने से आए लगभग 2500 कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे. ये कलाकार पारंपरिक नृत्य और संगीत के जरिए दर्शकों को भारत की विविधता का अहसास कराएंगे. इस साल की परेड में उन राज्यों को भी विशेष मौका दिया गया है जो पिछले साल किसी कारणवश शामिल नहीं हो पाए थे जिससे पूरे देश का प्रतिनिधित्व एक ही स्थान पर देखने को मिलेगा.
राज्यों की झांकियों में दिखेगी हस्तकला और लोक संस्कृति
इस बार की झांकियों में राज्यों की पारंपरिक कलाओं को प्रमुखता दी गई है. असम की झांकी में आशिरकांडी गांव की मशहूर हस्तकला देखने को मिलेगी तो वहीं महाराष्ट्र की झांकी में गणेशोत्सव को आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में दिखाया जाएगा. पश्चिम बंगाल की झांकी देश की आजादी की लड़ाई में बंगाल के महान योगदान को सलाम करेगी. राजस्थान, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्य अपनी सदियों पुरानी विरासत और लोक कलाओं को दुनिया के सामने पेश करेंगे. इसके अलावा गुजरात और छत्तीसगढ़ ‘वंदे मातरम’ की थीम को बहुत ही शानदार और अनोखे तरीके से प्रस्तुत करेंगे जिससे पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में डूब जाएगा.
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