Renowned Advocate Iqbal Chagla Death: देश के मशहूर वकील इकबाल छागला का निधन हो गया है। वे काफी समय से बीमार थे, जिसके चलते उन्होंने 85 साल की उम्र में आखिरी सांस ले ली। देश के अग्रणी वकीलों की सूची में शामिल इकबाल छागला के निधन को देश के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने बॉम्बे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहते हुए अपने ही पेशे में, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी और 6 वर्किंग जस्टिस के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए थे और उनके इस्तीफे दिलवाए। बॉम्बे बार एसोसिएशन ने उनके निधन पर शोक जताया और लोगों को उनके बारे में अवगत कराया। उनकी इमेज, वर्किंग, पर्सनैलिटी और अचीवमेंट के बारे में दुनिया को बताया। आइए विस्तार से बात करते हैं…
यह भी पढ़ें:कैलिफोर्निया में भड़की आग पर डराने वाली भविष्यवाणी का वीडियो वायरल, जानें Joe Rogan ने क्या कहा था?
3 बार बॉम्बे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे
1939 में जन्मे एडवोकेट छागला ने सेंट मैरी स्कूल से पढ़ाई की। कैम्बिज यूनिवर्सिटी से हिस्टी और लॉ में पोस्ट ग्रेजुएशन की। उनके पिता MC छागला बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे। उनके बेटे RI छागला बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस थे। उन्हें भी बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस का पद ऑफर हुआ था, लेकिन उन्होंने दोनों पद लेने से इनकार कर दिया था।
छागला 1990 से 1999 तक 3 बार बॉम्बे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। 1970 के दशक में छागला सीनियर वकील बने थे। वे दीवानी और कंपनियों के केस हैंडल करते थे। उन्हें 39 साल की उम्र में ही वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था। वे अपने पहनावे और भाषण कला के लिए मशहूर थे। कोर्ट में उनकी बहस सुनने के लिए भीड़ जुटती थी। वे म्यूजिक सुनने और गोल्फ खेलने के शौकीन थे।
यह भी पढ़ें:Anand Mahindra के ट्वीट कौन लिखता है, क्यों सोशल मीडिया पर रहते इतने एक्टिव?
चेतावनी के बावजूद पारित किए थे प्रस्ताव
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में छागला ने द इंडियन एक्सप्रेस के लिए ही एक कॉलम लिखा था, जिसमें उन्होंने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के बारे में बात की थी। उन्होंने लिखा कि 1990 में बॉम्बे हाईकोर्ट के 5 मौजूदा जजों के खिलाफ़ प्रस्ताव लाने की जिम्मेदारी मुझ पर आई, जिसमें उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाया गया और उनके इस्तीफ़े की मांग की गई।
मुझे दोस्तों ने चेतावनी दी थी कि यह स्पष्ट रूप से आपराधिक अवमानना है और मौजूदा कानून के तहत कोई बचाव नहीं है। हालांकि बहुत तीखी बहस हुई, लेकिन प्रस्ताव पारित किए गए। एक जज ने इस्तीफा दे दिया, 2 का तबादला कर दिया गया और 2 को आगे कोई न्यायिक कार्य करने से मना कर दिया गय। 5 साल बाद उन्हें एक और प्रस्ताव लाना पड़ा। इस बार बॉम्बे हाईकोर्ट के एक मौजूदा मुख्य न्यायाधीश पर भ्रष्टाचार के आरोप थे और उनके इस्तीफे की मांग की गई थी। इन न्यायाधीश को बाद में इस्तीफा भी देना पड़ा।
यह भी पढ़ें:गुजारे भत्ते पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; जानें किस केस का किया निपटारा और क्या था विवाद?
संबंधित खबरें
धीरेंद्र शास्त्री को झटका, विवादित टिप्पणी मामले में मानहानि केस दर्ज
4 mins agoNDPS-UAPA जैसे कानून भी संविधान से ऊपर नहीं, शीघ्र सुनवाई पर SC की टिप्पणी
1 hr ago7 हत्याओं से दहला बेंगलुरु, ड्राइवर ने पत्नी समेत 7 ससुरालियों की ली जान
2 hrs agoUPSC मेन्स परीक्षा का रिजल्ट जारी, direct link से डाउनलोड करें रिजल्ट PDF
2 hrs agoLIVE: दिल्ली की गफ्फार मार्केट में दुकान में लगी आग, 22 गाड़ियों ने बुझाई
3 hrs agoहोटल से अस्पताल तक आधार की फोटोकॉपी का झंझट खत्म, UIDAI का नया नियम लागू
3 hrs agoदुश्मन के खेमे में मचेगी 'प्रलय'! क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण
11 hrs ago'लोकतंत्र बचाओ, SIR रद्द करो', CJP का दिल्ली के बाद अब दक्षिण में आंदोलन
13 hrs agoचार घंटे, 70 सवाल... सौरव दास और आशुतोष रांका से क्राइम ब्रांच ने की पूछताछ
13 hrs agoECI में IT चीफ की पावर पर चली कैंची, अब सीनियर अफसर से लेनी होगी हर मंजूरी
17 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines