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सांस्कृतिक विरासत के लिए 'सांसद निधि' और 'CSR' के इस्तेमाल की सिफारिश, बजट कटौती और स्मारकों की सुरक्षा पर समिति सख्त

अनुदान मांगों की समीक्षा करते हुए रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सिफारिश का साथ साथ मंत्रालय के काम काज को लेकर भी चिंता जतायी है। संसद की स्थाई समिति ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि संरक्षित स्मारकों से विभाग को हर साल 365 करोड़ की कमाई टिकट बिक्री के जरिए होता है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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संसद की परिवहन, पर्यटन और संस्कृति से जुड़ी स्थायी समिति ने संस्कृत मंत्रालय को लेकर अपनी रिपोर्ट संसद के पटल पर पेश किया है। स्थाई समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा ने रिपोर्ट संख्या 388 की अनुदान मांगों की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण सिफारिश का साथ साथ मंत्रालय के काम काज को लेकर भी चिंता जतायी है। रिपोर्ट में स्मारकों के संरक्षण, बजट में भारी कटौती, स्टाफ की कमी और वैकल्पिक फंडिंग जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया है।

संसद की स्थाई समिति ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि संरक्षित स्मारकों से विभाग को हर साल 365 करोड़ की कमाई टिकट बिक्री के जरिए होता है। ये पैसा सीधे सरकारी खजाने में जाता है। सरकार का ऐसा कोई मैकेनिज्म बनाना चाहिए ताकि इस कमाई का कुछ हिस्सा, स्मारकों के रखरखाव, संरक्षण और स्मारक देखने आने वाले लोगों को स्मारक स्थल के आस पास बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाने पर किया जाए। सिस्टम ऐसा बनाए जाए कि प्राप्त राजस्व का हिस्सा उसी पर स्मारक पर ही खर्च किया जाए।

बजट में 34% की कमी

संजय कुमार झा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि संस्कृति मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के लिए ₹5,219.97 करोड़ की मांग की थी, लेकिन सरकार ने बजट में केवल ₹3,416.63 करोड़ ही आवंटित किए हैं। यह स्वीकृत राशि मंत्रालय की मूल मांग से 34.55% कम है। इतना ही नहीं, समिति ने सरकार द्वारा अगले पांच वर्षों के लिए तैयार की जा रही ₹12,000 करोड़ की प्रस्तावित बुनियादी ढांचा योजना (Infrastructure Scheme) को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

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समिति का कहना है कि इस कार्यक्रम की रूपरेखा पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए। इसके लिए सिफारिश की गई है कि व्यय वित्त समिति (EFC) के नोट के साथ-साथ एक विस्तृत कार्यान्वयन रोडमैप, राज्य-वार फंड उपयोग की योजना (Absorption Plan) और केंद्र-राज्य लागत-बंटवारे का एक पारदर्शी तंत्र तैयार किया जाए, ताकि योजना के परिणामों (Outcomes) का सटीक आकलन किया जा सके।

ASI में स्टॉफ की कमी और कानून में संशोधन

समिति ने एएसआई और केंद्रीय संरक्षित स्मारकों में सुरक्षा को लेकर भी चिंता जतायी है । इसकी वजह सुरक्षा कर्मचारियों की भारी कमी बताई गई है । स्थाई समिति ने ‘प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम’ में संशोधन की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हुए स्मारकों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त स्टाफिंग योजना बनाने की सिफारिश सरकार से की है।

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वैकल्पिक फंडिंग

संसदीय समिति ने संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए वैकल्पिक फंडिंग के मॉडल्स पर विशेष जोर दिया है। समिति ने अपनी सिफारिशों में स्पष्ट किया है कि केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहने के बजाय अन्य वित्तीय स्रोतों का प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

डेडिकेटेड CSR फंड की जरूरत

समिति ने रेखांकित किया कि साल 2022-23 में कॉर्पोरेट जगत ने ‘कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ (CSR) के तहत संस्कृति और विरासत के मद में लगभग ₹441 करोड़ खर्च किए हैं। इस आंकड़े को देखते हुए समिति का सुझाव है कि देश की ऐतिहासिक धरोहरों के लिए एक ‘डेडिकेटेड सीएसआर फंड’ तैयार किया जाना चाहिए। इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और स्मारकों के रखरखाव के लिए एक स्थायी वित्तीय तंत्र विकसित होगा।

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सांसद निधि (MPLAD) का इस्तेमाल

फंडिंग की कमी को दूर करने के लिए समिति ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया है कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLAD) के तहत खर्च की जाने वाली श्रेणियों में ‘सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण’ को भी शामिल किया जाए। यदि सांसदों को अपनी निधि से ऐतिहासिक स्थलों पर खर्च करने की अनुमति मिलती है, तो क्षेत्रीय स्तर पर विरासतों के पुनरुद्धार के लिए अतिरिक्त संसाधनों की कमी नहीं होगी।

स्वायत्त संस्थानों के वेतन बजट में कटौती पर चिंता

इसके अलावा, स्थायी समिति ने मंत्रालय के अधीन आने वाले उन 34 स्वायत्त संस्थानों की स्थिति पर भी चिंता जताई है जो पूरी तरह से सरकारी अनुदान पर निर्भर हैं। इन संस्थानों के वेतन बजट (GIA Salary) में लगभग ₹77 करोड़ (18%) की कटौती की गई है। समिति ने मंत्रालय से इस कटौती का विस्तृत प्रभाव आकलन (Impact Assessment) मांगा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन संस्थानों के कामकाज और कर्मचारियों के वेतन पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

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